वाणी एवं श्रवण निशक्त जन कल्याण केंद्र के स्थापना दिवस कार्यक्रम में पहुंचे राज्यपाल
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। अंतरराष्ट्रीय सांकेतिक भाषा दिवस व गुरुग्राम के वाणी एवं श्रवण निशक्त जन कल्याण केंद्र के 53 वें स्थापना दिवस पर राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की। कार्यक्रम में अतिरिक्त जिला उपायुक्त हितेश कुमार मीणा ने जिला प्रशासन की ओर से राज्यपाल को शॉल व स्मृति चिन्ह भेंट कर उनका स्वागत किया।
राज्यपाल ने कहा कि मूक एवं बधिरों के सर्वांगीण विकास के लिए समाज का जागरूक होना जरूरी है। सांकेतिक भाषा केवल बधिरों की ही नहीं बल्कि सभी की भाषा बने। उन्होंने सांकेतिक भाषा अर्थात् साइन लैंग्वेज सिखाने व सीखने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि सांकेतिक भाषा सीखने से माइंड एक्टिव बनता है। मूक एवं बधिर बच्चों के सांकेतिक भाषा सीखने से उनके जीवनयापन की राह आसान होने के साथ साथ वे विभिन्न क्षेत्रों में देश का नाम भी रोशन करेंगे। राज्य सरकार व केंद्र सरकार की निशक्तजनों के लिए बनाई गई योजनाओं का उल्लेख किया। इसके साथ ही उन्होंने सरकार की ओर से 18 वर्ष तक स्कूल ना जाने वाले दिव्यांगजनों को मासिक वित्तीय सहायता देने की जानकारी भी दी। उन्होंने बताया कि हरियाणा प्रदेश में मूक एवं बधिरों की संख्या लगभग एक लाख 50 हजार के करीब है। उन्होंने कहा कि बधिरों को सुनने की समस्या का सामना करना पड़ता है। उनकी यह समस्या सरकार और हम सब के लिए चुनौती है। इस चुनौती का सामना करने के लिए हम सभी को सामूहिक प्रयास करने होंगे।
राज्यपाल ने अपने संबोधन में परिवार पहचान पत्र का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में पीपीपी के शुरू होने से सरकार को दिव्यांगजनों का वास्तविक डेटा एकत्रित करने में सुविधा हुई है। इसके माध्यम से आपको विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ अब घर बैठे ही प्राप्त को रहा है।