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गुरुग्राम : अहोई अष्टमी का व्रत 28 को

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गुरुग्राम। संतान प्राप्ति व उनकी दीर्घायु के लिए अहोई अष्टमी का व्रत 28 अक्तूबर को होगा। पंडित डॉ. मनोज शर्मा कहना है कि शास्त्रों में उल्लेख है कि अहोई का शाब्दिक अर्थ है अनहोनी को होनी में बदलना। अहोई अष्टमी के दिन माताएं निर्जल व्रत रखकर अपनी संतान की सुरक्षा की कामना करती हैं। माना जाता है कि पूजा-पाठ व व्रत-उपवास में इतनी शक्ति होती है कि ये अशुभता को भी समाप्त कर देते हैं। इस व्रत का प्रारंभ महिलाएं प्रात: से ही करना शुरू कर देती हैं। करवाचौथ में इस्तेमाल किए गए करवे में भी जल भरा जाता है। कपड़े या दीवार पर 8 कोष्टक की एक पुतली बनाई जाती है। इसके पास ही महिलाएं स्याहू माता व उसके बच्चों की आकृतियां महिलाएं बनाती हैं। घर की वृद्ध महिलाओं से अहोई माता की कथा सुनकर उनकी पूजा-अर्चना भी करती हैं। सायं काल के समय आकाश में तारा दिखाई देने पर महिलाएं व्रत का समापन करती हैं। उनका कहना है कि करवे के जल का दिवाली के दिन घर में छिड़काव किया जाता है, जिससे घर में सुख-समृद्धि का निवास होना माना जाता है।
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