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Gurugram News: प्यासी धरती को तर करेगी ग्रीन वॉल, जीवित होंगी नदियां

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- सूख चुकी साहिबी, दोहन और कृष्णावती नदियों को करेगी पुनर्जीवित
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- गुरुग्राम शहर के भूजल स्तर में भी होगी बढ़ोतरी, किसानों को होगा फायदा
विवेक कुमार सिंह
गुरुग्राम। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट में शामिल अरावली ग्रीन वॉल परियोजना के ऊपर बीते महीने जमीनी स्तर पर काम शुरू हो गया है। इस परियोजना के माध्यम से जल निकायों व प्रदेश के दक्षिणी हिस्से से होकर कभी गुजरने वाली लुप्त हो चुकी नदियों को पुनर्जीवित करने में मदद मिलेगी। नदियों के फिर से जीवित होने से पेयजल की समस्या से जूझ रहे गुरुग्राम शहर के भूजल में भी बढ़ोतरी होगी। साइबर सिटी में बढ़ती आबादी के कारण भूजल स्तर की हालात लगातार खराब होती जा रही है। सिंचाई विभाग द्वारा किए गए सर्वे में इसकी पुष्टि हो चुकी है।
अरावली पर्वत शृंखला के साथ साथ गुजरात के पोरबंदर से हरियाणा के पानीपत तक बन रही ग्रीन वॉल प्रदेश के दक्षिणी जिलों से होकर गुजरेगी। हरियाणा के इस दक्षिणी क्षेत्र से कभी चार नदियां गुजरती थी, जिनमें बारह महीने पानी का सतत प्रवाह बना रहता था। बीते दशकों में हुए अरावली के शोषण और पेड़ों की अंधाधुंध कटाई के कारण यह नदियां लुप्त हो गई हैं। नदियों के सूखने के कारण बंजर भूमि में बढ़ोतरी हुई है, जिसे पुनर्जीवित करने के लक्ष्य के तहत ग्रीन वॉल परियोजना की शुरुआत की गई है। इस परियोजना के अंतर्गत गुरुग्राम, रेवाड़ी, महेंद्रगढ़, फरीदाबाद और पानीपत जिले में करोड़ों पौधे लगाए जाएंगे।
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कैसे जीवित होंगी लुप्त हो गई नदियां
बीते दशकों में लगातार कम हुए पेड़ों का असर नदियों के जीवन पर पड़ा है। बारह महीने बहने वाली नदियां अब केवल बरसाती नाला बनकर रह गई हैं। ग्रीन वॉल के तहत होने वाले पौधरोपण से नदियों को नया जीवन मिलेगा। पौधे के जरिए मिट्टी बारिश के पानी को सोख लेती है और वह पेड़ों की जड़ों के माध्यम से मिट्टी तक धीरे-धीरे पहुंचता है। इससे वर्ष भर नदी में पानी बना रहता है, लेकिन पेड़ ना होने से बारिश का पानी बहकर नष्ट हो जाता है।

नदियों के पुनर्जीवित होने से बढ़ेगा गुरुग्राम का जलस्तर :
बीते दो दशक में तेजी से बढ़े शहरीकरण का असर शहर के भूजल स्तर पर पड़ा है। सिंचाई विभाग द्वारा किए एक सर्वे में सामने आया है कि शहर के कुछ क्षेत्रों में हालात बेहद चिंतनीय हैं। सर्वे के अनुसार शहर में भूजल स्तर वर्ष 1974 से 2021 तक करीब छह गुना गिर चुका है।
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दक्षिण हरियाणा के किसानों को होगा फायदा, बढ़ेगी उपजाऊ भूमि
ग्रीन वॉल परियोजना के चलते पुनर्जीवित होने वाली नदियों से प्रदेश के दक्षिणी हिस्से में मौजूद बंजर भूमि उपजाऊ भूमि में परिवर्तित हो जाएगी। इससे प्रदेश में खेती का दायरा बढ़ेगा। सिंचाई के लिए होने वाले किसानों के खर्च में भी कटौती आएगी। इससे किसानों की आय में वृद्धि होगी।
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दक्षिणी हिस्से से गुजरने वाली नदियां
साहिबी नदी - गुरुग्राम, रेवाड़ी
दोहन नदी - रेवाड़ी, महेंद्रगढ़
कृष्णावती नदी - रेवाड़ी, झज्जर
यमुना - फरीदाबाद, पानीपत
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बुंदेलखंड में मौजूद ओड़ी नदी को पेड़ लगाकर किया गया था पुनर्जीवित
बुंदेलखंड में पेड़ों की कमी के कारण ओड़ी नदी पूरी तरह से सूख गई थी, लेकिन वर्ष 2018 में क्षेत्र के लोगों ने नदी को पुनर्जीवित करने का बीड़ा उठाया। वृक्षों के कारण आज ओड़ी नदी में साल भर पानी बहता है। इससे हजारों एकड़ जमीन की अब सिंचाई होने लगी है।
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