सामान डिलीवर करने वाले कर्मियों की सामाजिक सुरक्षा के लिए बोर्ड का गठन करने की तैयारी
उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने गुरुग्राम में गिग वर्कर्स की सोशल सिक्योरिटी को लेकर मार्केट के प्रतिनिधियों के साथ किया विचार-विमर्श
गिग वर्कर्स की सहायता के लिए बिल लाएगी सरकार : दुष्यंत चौटाला
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। सरकार इस कैबिनेट बैठक में प्रदेश के करीब 53 लाख गिग वर्कर्स यानी सामान, सेवा और भोजन डिलीवर करने वाले कामगारों की सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा का बिल प्रस्तावित करेगी। इसके लिए राज्य स्तरीय बोर्ड का गठन किया जाएगा। बिल का नाम द हरियाणा गिग वर्कर्स वेलफेयर बोर्ड बिल-2024 प्रस्तावित है।
उप मुख्यमंत्री दुष्यंत सिंह चौटाला ने मंगलवार को गुरुग्राम के पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस सभागार में इसकी जानकारी दी। वह विभिन्न प्रकार की सेवा प्रदाता कंपनियों के अधिकारियों, औद्योगिक व वाणिज्यिक संगठनों के पदाधिकारियों, श्रम, परिवहन, कराधान विभागों के उच्च प्रशासनिक अधिकारियों के साथ इस प्रस्ताव के लिए विचार विमर्श करने पहुंचे थे।
उप मुख्यमंत्री दुष्यंत सिंह चौटाला ने बैठक में बताया कि राज्य में असंगठित सेवा क्षेत्र के लगभग 52 लाख 70 हजार वर्कर हैं। यह जोमैटो, ओला, उबर, स्विगी, फ्लिपकार्ट, अमेजन जैसी ई-कॉमर्स कंपनियों के लिए काम कर रहे हैं। बाइक, स्कूटर, छोटे वाहनों पर सेवाएं देने वाले यह वर्कर पार्ट और फुल टाइम (पूर्ण व आंशिक) कर्मचारी हो सकते हैं। इनके लिए अब तक किसी प्रकार के बीमा, पीएफ, मेडिकल सेवा या अन्य भत्तों का प्रावधान नहीं है। सरकार गिग या मोबिलिटी वर्करों के लिए भी भवन निर्माण श्रमिकों की तरह ही एक कल्याण बोर्ड बनाने की तैयारी में है। डिप्टी सीएम ने सुझाव दिया कि इनको गिग वर्कर की बजाय मोबिलिटी वर्कर कहा जाए।
इनके लिए बोर्ड का गठन होने पर किसी भी असामान्य स्थिति में इन वर्करों और परिजनों को आर्थिक सहायता देने का प्रावधान होगा। उन्होंने कहा कि भारत सरकार ने ई-श्रम पोर्टल को शुरू कर श्रमिकों का पंजीकरण करवाया है। असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों की भलाई के लिए अनेक योजनाएं चलाई जा रही है। इसमें उनके बच्चों की शिक्षा के लिए आर्थिक सहायता प्रदान करना, बेटी की शादी पर अनुदान देना, साइकिल खरीदने के लिए भत्ता प्रदान सहायता शामिल है।
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि पड़ोसी राज्य राजस्थान में इसी प्रकार का बोर्ड बनाए जाने की प्रक्रिया शुरू की गई है। हरियाणा सरकार ने भी असंगठित क्षेत्र में सेवा करने वाले युवाओं की भलाई के लिए यह बोर्ड बनाने का प्रयास आरंभ किया है। उन्होंने बताया कि हरियाणा गिग वर्कर्स वेलफेयर बोर्ड वैधानिक प्रक्रिया पूरी करके बनाई जाएगी। इसमें आबकारी एवं कराधान विभाग, उद्योग एवं वाणिज्य विभाग, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग, परिवहन विभाग, श्रम विभाग, मोबिलिटी वर्करों एवं ई-कॉमर्स कंपनियों के प्रतिनिधि होंगे। यह बोर्ड मोबिलिटी वर्करों के अधिकारों की रक्षा करने का कार्य करेगा।
गिग वर्कर्स की भलाई के सहयोग की अपील
श्रम विभाग के प्रधान सचिव राजीव रंजन ने कहा कि गिग वर्कर्स की भलाई के लिए सरकार एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। इसमें सभी कंपनियों को सहयोग करना चाहिए। आबकारी एवं कराधान विभाग के राज्य आयुक्त अशोक कुमार मीणा ने कहा कि सेवा क्षेत्र में काम कर रही कंपनियों को वर्करों के हितों में इस वेलफेयर बिल के पक्ष में सुझाव रखने चाहिए। इसे बिल को जल्द लागू करने में मदद मिलेगी। बैठक में श्रम विभाग के अतिरिक्त श्रम आयुक्त कुशल कटारिया, संयुक्त सचिव परमजीत सिंह, रोडवेज जीएम देवदत्त मौजूद रहे।
उपभोक्ताओं पर मोबिलिटी वर्कर वेलफेयर सेस लगा सकती है सरकार
उपभोक्ताओं को दी जा रही सेवाओं पर मोबिलिटी वर्कर वेलफेयर सेस के नाम से अत्यंत मामूली शुल्क लगाया जा सकता है। इसकी राशि मोबिलिटी वर्करों के कल्याण के लिए खर्च की जाएगी। डिप्टी सीएम ने कहा कि इसकी प्राथमिक तैयारी की जा चुकी है।
एक सप्ताह के भीतर कंपनियों से मांगे सुझाव
मंगलवार की बैठक में नैसकाम, अमेजन, जोमैटो के पदाधिकारियों ने अपने सुझाव रखे। उपमुख्यमंत्री दुष्यंत सिंह चौटाला ने कहा कि वे इस बिल पर सभी कंपनियां अपने सुझाव एक सप्ताह के भीतर प्रस्तुत करें। उनके सुझावों पर सरकार गंभीरता से विचार करेगी। इसके अलावा मोबिलिटी वर्करों से भी इस बारे में सुझाव लिए जाएंगे।