इकाइयों में श्रमिकों की उपस्थिति पर पड़ा असर, असहजता का वातावरण
दीपक शर्मा
मानेसर। पड़ोसी जिले नूंह में सोमवार को भड़की हिंसा के बाद उसका असर गुरुग्राम में भी व्यापक तौर पर देखा जा रहा है। मानेसर की औद्योगिक इकाइयों में श्रमिकों की उपस्थिति और उत्पादन भी प्रभावित हुआ है। अनुमान के मुताबिक दो दिन में 20 से 30 फीसदी तक श्रमिकों की उपस्थिति प्रभावित हुई है।
सबसे ज्यादा प्रभाव गारमेंट उत्पादन पर पड़ा है। यहां से दूसरे देशों में निर्यात होने वाले ऑर्डर भी प्रभावित हो सकते हैं। आईएमटी इंडस्ट्रियल एसोसिएशन (आईआईए) की ओर से शांति की अपील की गई है। श्रमिकों सहित क्षेत्र के लोगों से अपील की है कि वह अफवाहों पर ध्यान न दें। औद्योगिक इकाइयों में सभी लोग सौहार्दपूर्ण तरीके से काम करते आए हैं और कर रहे हैं।
मानेसर में रेडीमेड गारमेंट की यूनिटें अच्छी खासी संख्या में हैं। यहां पर बाहर से आए कारीगर ही बड़ी संख्या में काम करते हैं। इसके अलावा यहां पर मैकेनिकल इंस्ट्रूमेंट, यूनानी दवा आदि के प्रोडक्ट, बेल्डिंग यूनिट्स आदि भी बड़ी संख्या में हैं। इनमें ज्यादातर कर्मी बाहर से ही हैं। सोमवार की घटना के बाद यहां असहजता है।
आईएमटी इंडस्ट्रियल एसोसिएशन के महासचिव मनोज त्यागी कहते हैं कि यह कहना कि कुछ प्रभाव नहीं पड़ा, सही नहीं होगा। यहां की औद्योगिक ईकाइयों में सभी वर्गों के कारीगर काम करते हैं। एक कारीगर के काम से दूसरे कारीगर का कम जुड़ा हु्आ है। अगर एक कारीगर गैर हाजिर रहता है तो इससे उत्पादन की पूरी बेल्ट प्रभावित होती है। यहां सबसे ज्यादा प्रभाव रेडीमेड गारमेंट के काम पर पड़ा है।
एसोसिएशन की सभी से अपील है कि लोग अफवाहों पर ध्यान न दें। सौहार्द बनाए रखें।
- अतुल मुखी, अध्यक्ष आईआईए
औद्योगिक उत्पादन प्रभावित तो हुआ है, हमें उम्मीद है जल्द सब कुछ ठीक हो जाएगा।
- मनोज त्यागी, महाचिव, आईआईए
स्टाॅल लगाने वाले सड़कों पर नहीं दिखे
मानेसर में सड़कों पर खाने पीने के सामान और चाय आदि का स्टाॅल लगाने वाले लोग औद्योगिक ईकाइयों में काम करने वाले कामगारों पर ही निर्भर रहते हैं। बुधवार को स्टाॅल लगाने वाले सड़कों पर नहीं दिखाई दिए।
अतुल मुखी, अध्यक्ष आईआईए
अतुल मुखी, अध्यक्ष आईआईए