फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Gurugram News: करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी सार्वजनिक शौचालय बदहाल

विज्ञापन
विज्ञापन
सीट, दरवाजे, टोंटी व टाइल्स टूटी पड़ी हैं, दुर्गंध के कारण सांस लेना हो जाता है दूभर
विज्ञापन

वरुण त्रिवेदी
गुरुग्राम। साल 2017 में अक्षय कुमार अभिनीत फिल्म टॉयलेट एक प्रेम कथा से नगर निगम ने प्रेरणा नहीं ली है। इस फिल्म को सरकारी प्रयासों से भी जोड़कर देखा गया। करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी शहर के सार्वजनिक शौचालयों की स्थिति ठीक नहीं है। हालत यह है कि शहर के एक तिहाई से अधिक शौचालय बदहाल हैं। इन शौचालयों में सीट, दरवाजे, टोंटी व टाइल्स टूटी पड़ी हैं। दुर्गंध व गंदगी के कारण सांस लेना दूभर हो जाता है। सबसे ज्यादा खराब स्थिति प्रमुख बाजारों व बस्तियों के आसपास बने शौचालयों की है। कई स्थानों पर शौचालय पर ताले लगे होने से इनका उपयोग नहीं हो रहा है।

-
दीवार व छत हो चुकी है जर्जर
जेल रोड काॅम्प्लेक्स पर नगर निगम के सार्वजनिक शौचालय बने हुए हैं। इसकी हालत बेहद खस्ता है। यहां फ्लश, टाेंटी, सीट व फर्श टूटी पड़ी हैं। दरवाजे नीचे से गल चुके हैं। सोहना चौक स्थित सार्वजनिक शौचालय के अंदर कबाड़ जमा है। शौचालयों में गंदगी के चलते सांस लेना दूभर है। दीवार व छत जर्जर हो चुकी है।
विज्ञापन


-
शौचालय पर लगा रहता है ताला
गुरुद्वारा रोड पर नेहरू पार्क के बाहर बने निगम के सार्वजनिक शौचालय पर ताला लटका रहता है। इसमें महिलाओं व दिव्यांगों के लिए विशेष सुविधाएं हैं। लोग इसका प्रयोग नहीं कर पा रहे हैं। शौचालय के सामने गंदगी से खड़े होना दूभर है। ऐसे ही हालात शहर के अन्य इलाकों में स्थिति अधिकतर सार्वजनिक शौचालयों के हैं।


-
डाकखाना चौक के शौचालय पर अवैध कब्जा

सदर बाजार के डाकखाना चौक पर सार्वजनिक शौचालय है। इस शौचालय के बाहर रेहड़ी व पटरी दुकानदारों ने कब्जा कर रखा है। शौचालय की दीवार पर जूते व अन्य सामान टांगे जाते हैं। इससे यह शौचालय दिखाई भी नहीं देता है। इस पर लंबे समय से ताला लटका हुआ है। जिससे बाजार में आने वाली महिलाओं और युवतियों को परेशानी होती है।


नई एजेंसियों को सौंपा गया काम

बीते तीन महीने से निगम के शौचालयों के रखरखाव के टेंडर समाप्त होने से एजेंसियों ने काम बंद किया था। रखरखाव के अभाव में कई शौचालयों पर ताले लटक रहे थे। कार्यकारी अभियंता के मुताबिक, टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद नई एजेंसियों को काम अलाॅट कर दिए गए हैं।





सालाना साढ़े पांच करोड़ से अधिक खर्च

शहर में नगर निगम के 133 सार्वजनिक शौचालय हैं। अब यह शौचालय बदहाल हैं। देखरेख के अभाव में किसी का दरवाजा तो किसी में पानी की टोंटी गायब है। शहर के सदर बाजार, खाड़सा रोड व डाकखाना चौक, सेक्टर-12 समेत विभिन्न स्थानों पर सार्वजनिक शौचालय बनवाए गए हैं। इन शौचालयों के रखरखाव का जिम्मा निजी एजेंसियों के पास रहा। इसके एवज में निगम की ओर से एजेंसियों को सालाना साढ़े पांच करोड़ से अधिक का भुगतान किया जाता है।

-
शौचालयों की बदहाली बनेगी स्वच्छता रैंकिंग में रोड़ा
केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय की स्वच्छता रैंकिंग में सार्वजनिक शौचालय एक बड़ा मानक है। इसमें नगर निगम गुरुग्राम फिसड्डी साबित हो रहा है। शहर के एक तिहाई से अधिक शौचालय बदहाल हैं। इसके बावजूद मजबूरी में लोग बदहाल शौचालयों में जा रहे हैं। सबसे ज्यादा खराब स्थिति प्रमुख बाजारों व बस्तियों के आसपास बने शौचालयों की है। कई स्थानों पर शौचालय पर ताला बंद होने से इनका उपयोग नहीं हो रहा है। बदहाल शौचालय शहर की स्वच्छता रैंकिंग में रोड़ा बन सकते हैं।
शहर की स्वच्छता रैंकिंग
- वर्ष 2020 - 62वीं

- वर्ष 2021 - 24वीं

- वर्ष-2022 -19वीं

- वर्ष 2023 -140वीं

-
कोट:

निजी एजेंसियों को निगम के सार्वजनिक शौचालयों के रखरखाव की जिम्मेदारी सौंपी गई है। जल्द ही शौचालयों की व्यवस्थाएं दुरुस्त हो जाएंगी।- निजेश कुमार, कार्यकारी अभियंता नगर निगम, गुरुग्राम
विज्ञापन


मिलेनियम सिटी के बाजारों में शौचालयों की कमी है। नगर निगम को इस बारे में ठोस प्रयास करना चाहिए। बाजारों में महिलाओं के लिए टॉयलेट नहीं हैं।-पूनम, एनजीओ संंचालिका
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें