35 वर्ष पहले खरीदे गए प्लाट का अभी तक नहीं मिला है खरीदार को कब्जा
जिला उपभोक्ता कष्ट निवारण आयोग ने जारी किया था गिरफ्तारी वारंट
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। 35 वर्ष पहले हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) से खरीदे गए प्लाट का अब तक कब्जा न दिए जाने के मामले की सुनवाई करते हुए जिला उपभोक्ता कष्ट निवारण आयोग (डीसीडीआरसी) ने संपदा अधिकारी द्वितीय के लिए गिरफ्तारी वारंट जारी करते हुए 24 अप्रैल को आयोग के समक्ष हाजिर होने के आदेश दिए थे। संपदा अधिकारी द्वितीय ने इसके खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की थी जिसके बाद उन्हें आयोग के समक्ष हाजिर होने के मामले में स्थगन आदेश मिल गया है।
सेक्टर-39 में शहर के निवासी विवेक जैन ने सन 1988 में एक प्लाट खरीदा था। इस प्लाट के लिए उन्होंने प्राधिकरण को कीमत भी चुका दी थी। निर्धारित प्रक्रिया पूरी करने के बाद भी अगले 20 साल तक खरीदार को प्लाट पर कब्जा नहीं दिया गया। इसके बाद सन 2011 में विवेक जैन ने जिला उपभोक्ता कष्ट निवारण आयोग का दरवाजा खटखटाया। आयोग ने सुनवाई के बाद सन 2012 में आदेश दिया कि प्राधिकरण खरीदार के या तो पैसे वापस करे या उसका प्लाट उसे दे। इसके बाद भी प्राधिकरण ने आयोग के आदेश का पालन नहीं किया और विवेक जैन अपना प्लाट पाने के लिए इधर से उधर भटकते रहे।
पिछले महीने 22 मार्च को आयोग ने सुनवाई करते हुए संपदा अधिकारी द्वितीय के लिए वारंट जारी करते हुए स्थानीय पुलिस को आदेश दिया कि वह 24 अप्रैल को संपदा अधिकारी द्वितीय का आयोग के समक्ष प्रस्तुत होना सुनिश्चित करें। इसके बाद संपदा अधिकारी द्वितीय ने अदालत का रुख किया था और दलील दी थी कि उन्हें भी अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाए। अदालत ने उनके वारंट पर स्थगन आदेश दिया है। संपदा अधिकारी द्वितीय जितेंद्र गर्ग ने बताया कि इस मामले में प्राधिकरण की बात तो सुनीं ही नहीं गई है। अदालत से यही कहा गया और उनकी दलील को स्वीकार किया गया। इसी के चलते उन्हें वारंट पर स्थगन आदेश मिल गया है।