तीन साल पहले उपभोक्ता को भेजा गया था गलत बिजली बिल
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। तीन साल पहले बिजली विभाग की तरफ से उपभोक्ता को 4.94 लाख रुपये का बिल भेजने के मामले में जिला अदालत ने बिल को गलत मानते हुए उपभोक्ता को 24 प्रतिशत ब्याज की दर से रुपये वापस करने का आदेश दिया है। यह आदेश सिविल जज सौरभ शर्मा की अदालत ने दिया है। उपभोक्ता ने बिजली विभाग की तरफ से नोटिस आने के बाद अदालत के आदेश पर 2.51 लाख रुपये जमा करा दिए थे।
अधिवक्ता क्षितिज मेहता ने बताया कि गांव रायसीना निवासी को बादशाहपुर डिवीजन की तरफ से 28 जून 2020 को 4.94 लाख रुपये का बिल भेज दिया गया था। बिल आने के बाद जब उन्होंने बिजली निगम से इसके बारे में जानकारी मांगी गई तो उनकी तरफ से कहा गया कि पुरानी रीडिंग बकाया को लेकर बिल दिया गया है,लेकिन विभाग की तरफ से पुरानी रीडिंग की जानकारी नहीं दी गई। उपभोक्ता ने राशि जमा नहीं कराई तो विभाग की तरफ से कनेक्शन काट दिया गया। इसके बाद उपभोक्ता ने अदालत में याचिका दायर की गई। उस समय अदालत की तरफ से उपभोक्ता को आदेश दिया है कि वह 2.51 लाख रुपये जमा करा दे और विभाग उपभोक्ता का कनेक्शन जोड़ दे। अदालत में मामले की सुनवाई के दौरान बिजली विभाग अतिरिक्त बिल साबित नहीं कर सका। अधिवक्ता ने बताया कि विभाग ने अदालत में माना की उन्होंने गलत रीडिंग उपभोक्ता के बिल में जोड़कर भेज दी। अदालत ने आदेश दिया कि बिजली निगम को जमा कराई गई राशि पर 24 प्रतिशत ब्याज दर से उपभोक्ता को वापिस की जाए।