स्वच्छ सर्वेक्षण में कम रैंकिंग होने पर लोग निगम के सफाई व्यवस्था पर उठा रहे सवाल
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। नगर निगम का सफाई व्यवस्था के लिए करीब 550 करोड़ रुपये का सालाना बजट होने के बाद भी शहर में जगह-जगह कूड़े के ढेर लगे रहते हैं। कई ऐसी काॅलोनियां हैं, जहां पर नियमित सफाईकर्मी तक नहीं पहुंचते। निगम अपने कर्मचारियों के साथ निजी छह एजेंसियों की मदद से शहर में सफाई का कार्य करता है। निगम क्षेत्र में सरकारी और निजी मिलाकर करीब छह हजार सफाई कर्मचारी तैनात हैं।
बता दें कि केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय की ओर जारी स्वच्छ सर्वेक्षण की रिपोर्ट में नगर निगम गुरुग्राम राष्ट्रीय स्तर पर 140वें स्थान पर रहा है। जबकि, पिछले साल 19वां स्थान था। ऐसे में नगर निगम की सफाई व्यवस्था पर लोग सवाल उठा रहे हैं। लोगों का कहना है कि भारी भरकम राशि खर्च करने के बाद भी शहर की सफाई व्यवस्था में सुधार नहीं हो रहा है। उनका कहना है कि कई कालोनियों में सफाई कर्मचारी तक नहीं पहुंच पाते हैं। लोगों को खुद ही सफाई व्यवस्था करानी पड़ती है।
वहीं शहर में इको ग्रीन कंपनी का भी काम ठीक नहीं है। डोर-टू-डोर कूड़े का सही तरीके से उठान नहीं होने से शहर में प्रमुख रूप से गंदगी की समस्या रहती है। इससे स्थानीय लोगों को परेशानी उठानी पड़ती है। शहर की काॅलोनियों, सेक्टर और बाजारों से अक्सर कूड़ा का उठान नहीं होने की समस्या रहती है।
इंदौर के भ्रमण के बाद भी सुधार नहीं
इस बार शहर की रैंकिंग में सुधार के बजाय गिरावट दर्ज की गई है। लोगों का कहना है कि निगम शहर की सफाई व्यवस्था को लेकर गंभीर नहीं है। करीब 550 करोड़ सफाई व्यवस्था पर खर्च करने के बाद भी रैंकिंग में सुधार नहीं हुआ है। उनका कहना है कि निगम अधिकारी व पार्षद इंदौर एमपी का दौरा केवल टूर के लिए करते हैं। यदि वहां से कुछ सीखा होता तो रैंकिंग में गिरावट नहीं होती। इंदौर टूर में आम लोगों के टैक्स का पैसा खर्च होता है। निवर्तमान पार्षदों और अधिकारियों के एक दल ने इंदौर का दौरा कर सफाई व्यवस्था का जायजा लिया था। नगर निगम इंदौर मॉडल गुरुग्राम में लागू नहीं कर पाया है। ऐसे में शहर की सफाई व्यवस्था में सुधार नहीं हो रहा है।
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घर से कूड़ा अलग करने की योजना धड़ाम
नगर निगम ने कूड़ा निस्तारण को बेहतर करने के लिए घर से गीला और सूखा कूड़ा अलग करने की योजना बनाई थी। स्वच्छ सर्वे की रिपोर्ट में नगर निगम को 14.88 फीसदी नंबर मिले हैं। ऐसे में नगर निगम की योजना अभी कुछ जगहों तक ही सीमित है। पूरे शहर में इसे लागू नहीं किया जा सका है। इससे नगर निगम के नंबर कट गए। लोगों का कहना है कि जब घर तक कूड़े की गाड़ी पहुंचती ही नहीं तो कूड़ा कहां से अलग-अलग होगा। निगम के अधिकारी बयान देने में आगे रहते हैं। जमीनी हकीकत से उनका कोई वास्ता नहीं होता है। वहीं, डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन में 85.13 फीसदी नंबर मिले हैं। यहां पर भी स्थिति बेहतर नहीं हैं।
वर्जन-
सफाई व्यवस्था को बेहतर करने के लिए कदम उठाया जा रहा है। इसके लिए नए सिरे से कार्य किया जा रहा है। बीच में कर्मचारियों की हड़ताल से सफाई कार्य प्रभावित हुआ था। - डाॅ. नरेश कुमार, संयुक्त आयुक्त जोन दो
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लोगों से बातचीत
निगम क्षेत्र में सफाई व्यवस्था काफी खराब है। कालोनी में कभी-कभार ही कूड़े की गाड़ी आती है। इसे लेकर निगम को कदम उठाने की जरूरत है। - मनोज मिश्र, सूर्या विहार
नियमित रूप से कूड़ा गाड़ी नहीं आने से परेशानी होती है। स्थानीय लोगों ने अपने स्तर पर कूड़ा उठाने का इंतजाम किया है। निगम सफाई को लेकर गंभीर नहीं है। -रूपा देवी, सेक्टर 37सी
प्वाइंटर:
- शहर में तैनात हैं करीब 5000 सफाई कर्मचारी
- इस बार 85 दिनों तक हड़ताल पर ही बैठे रहे कर्मचारी
- प्रतिदिन गुरुग्राम से निकलता है करीब 800 टन कूड़ा
- शहर में 20 से ज्यादा खुले स्थानों पर ही बने हैं डंपिंग प्वाइंट