युवाओं को वोट की चोट का महत्व बता रहे शतकवीर बुजुर्ग
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। उम्र का आंकड़ा भले ही 100 से पार जा चुका है, लेकिन मतदान का जज्बा अभी बरकरार है। उम्र का शतक लगाने वाले कई मतदाता गुरुग्राम में भी हैं। आजादी के बाद से शुरू हुए लोकतंत्र के इस उत्सव में यह हर बार भाग लेते हैं। अब यह बुजुर्ग युवाओं को भी वोट का महत्व बताते हुए मतदान करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
जिला निर्वाचन अधिकारी एवं डीसी निशांत कुमार यादव ने बताया कि नए वोटर बने युवाओं को वोट का महत्व बताने और मतदान को प्रेरित करने के लिए विभिन्न आयोजन हो रहे हैं। इसी कड़ी में सौ वर्ष की आयु पूरी कर चुके बुजुर्गों के माध्यम से अब युवाओं को मतदान के लिए प्रेरित किया जा रहा है। जिले की चारों विधानसभा में सौ वर्ष से अधिक आयु के कुल नौ मतदाता हैं। ये बुजुर्ग मतदाता पूरे जज्बे के साथ युवाओं को मतदान का महत्व समझा रहे हैं।
पटौदी विधानसभा में कासन निवासी 102 वर्षीय हीरा लाल बताते हैं कि स्वतंत्र भारत में वर्ष 1952 में हुए पहले आमचुनाव में मतदान किया था। गुलामी के लंबे दौर के बाद देशवासियों को वोट डालने अधिकार मिला। वह बताते हैं कि उस अनुभव को शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। वोट के रूप में देश के हर नागरिक को अपना मत रखने की महाशक्ति मिली थी।
इसी तरह पटौदी विधानसभा बलेवा गांव निवासी 101 वर्षीय फूला देवी बताती हैं कि देश की आजादी के बाद भले ही महिलाओं को अपने विभिन्न हकों के लिए संघर्ष करना पड़ा हो, लेकिन वोट ही एक मात्र माध्यम था जिसको लेकर वे स्वतंत्र थी। उन्होंने युवाओं से किसी प्रलोभन के प्रभाव में न आकर स्वतंत्र रूप से मतदान करने का आह्वान किया है। गुरुग्राम विधानसभा में गांव कन्हई निवासी 101 वर्षीय चंद्रकला ने कहा कि आजादी के बाद आधुनिक तकनीक ने मतदान को काफी आसान बना दिया है। पहले जहां बैलेट पेपर से मतदान करना एक लंबी प्रक्रिया रही है। वहीं अब ईवीएम ने इसे बेहद सरल बना दिया है। हर वोटर अपने संविधान के अधिकार को समझें और मतदान जरूर करें।