गुरुग्राम। आईएमटी मानेसर थाना क्षेत्र में स्थित एक प्लाट की फर्जी तरीके से बिक्री कर दंपती ने एक महिला को 3.75 करोड़ की चपत लगा दी। आरोपी दंपती ने प्लॉट पर पहले से ही एचडीएफसी बैंक से 8 करोड़ का लोन ले रखा है, लेकिन सौदे के समय आरोपियों ने महिला को इसकी जानकारी नहीं दी थी। खुद के साथ इतनी बड़ी धोखाधड़ी होने पर महिला के पति को गहरा सदमा लगा। इससे उनकी 8 जनवरी को मौत हो गई थी।
मानेसर तहसील अंतर्गत कुकड़ोला गांव निवासी सुनीता यादव ने आईएमटी मानेसर थाने में दी शिकायत में बताया कि वह गृहिणी है। 2011 में मानेसर के औद्योगिक क्षेत्र में स्थित उनकी जमीन का सरकार ने अधिग्रहण किया था। उसका कुछ पैसा उन्हें 2020-21 में मिला था। इसकी जानकारी सेक्टर-10 गुरुग्राम निवासी मंजू रानी व संदीप यादव को भी हुई। फरवरी 2021 में दोनों पति-पत्नी ने महिला से आईएमटी मानेसर स्थित उसके दामाद मनोज की फैक्ट्री में मुलाकात की। मुलाकात के दौरान दंपती ने सेक्टर-6 फेज-2 आईएमटी मानेसर में खुद का एक औद्योगिक प्लॉट होने की बात बताई और पैसे की जरूरत की बात कहते हुए महिला से प्लॉट को खरीदने का अनुरोध किया।
2 करोड़ खाते में व 1.75 करोड़ नकद दिए:
इसके बाद महिला उक्त प्लॉट खरीदने के लिए राजी हो गई। महिला ने प्लॉट खरीदने की एवज में 2 करोड़ रुपये मंजू रानी के खाते में ट्रांसफर कर दिए। इसके बाद आरोपियों ने खाते में ज्यादा पैसे ट्रांसफर करने पर स्टांप शुल्क भी ज्यादा लगने की बात कहते हुए 1.75 करोड़ रुपये नकद ले लिए। महिला ने एक समझौता पत्र पर हस्ताक्षर कर 1.75 करोड़ रुपये नकद दे दिए। रजिस्ट्री के लिए 28 दिसंबर 2021 का दिन तय किया गया।
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उधार में पैसे लेने का बनवाया था एग्रीमेंट :
पीड़िता ने एग्रीमेंट को बारीकी से पढ़ा तो आरोपियों ने पांच माह के लिए 1.75 करोड़ रुपये उधार लेने की बात कही थी। इस पर पीड़िता ने आपत्ति जताई तो आरोपियों ने 9 मार्च को नया एग्रीमेंट दे दिया। महिला को आरोपियों की कार्यशैली पर पहले से ही शक हो गया था। इसी वजह से पीड़िता ने एचएसआईआईडीसी को पहले ही पत्र लिखकर खुद के एग्रीमेंट व उक्त प्लॉट की बिक्री किसी और को न करने का अनुरोध किया था। तय समय के मुताबिक 28 दिसंबर को पीड़िता जब रजिस्ट्री के लिए मानेसर तहसील पहुंच गई लेकिन आरोपी दंपती नहीं आए।
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किसी और के नाम पर है प्लॉट:
आरोपियों ने पीड़िता से 31 दिसंबर को रजिस्ट्री के लिए आने की बात कही, लेकिन आरोपी उस दिन भी नहीं आए। इस पर पीड़िता का शक गहराया और उसने प्लॉट के बारे में जानकारी ली तो पता चला कि जिस प्लॉट को आरोपी अपना बता रहे थे वह मैसर्स पीआर टेक्नो प्लास्ट के नाम पर है और आरोपी दंपती उसके निदेशक हैं। इतना ही नहीं आरोपियों ने उक्त प्लॉट पर एचडीएफसी बैंक से पहले ही 8 करोड़ रुपये का लोन ले रखा है जिसकी जानकारी पीड़िता को नहीं दी गई थी।