राजेंद्रा पार्क क्षेत्र में छह साल की बच्ची का अपहरण कर दुष्कर्म करने के मामले में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने दोषी नाबालिग को 20 साल सश्रम कैद की सजा सुनाई है। अदालत ने यह आदेश 2015 में जुवेनाइल जस्टिस एक्ट में हुए संशोधन के आधार पर अपराध को संगीन श्रेणी में रखते हुए सुनाया है।
पीड़ित पक्ष की वरिष्ठ अधिवक्ता अंजू रावत नेगी व कुलभूषण भारद्वाज ने बताया कि 26 जुलाई 2016 को राजेंद्रा पार्क थाना क्षेत्र में बच्ची को उसके पड़ोस में रहने वाले मूलरूप से बिहार निवासी नाबालिग ने अगवा कर दुष्कर्म किया था। आरोपी को जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड में पेश कर बाल सुधारगृह भेज गया था। उसके परिजनों ने बोर्ड के समक्ष कहा कि वह नाबालिग है, इसलिए उसका मामला जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड में ही सुना जाए।
इस पर पीड़िता के अधिवक्ताओं ने अदालत से गुहार लगाई थी कि आरोपी ने संगीन वारदात को अंजाम दिया है। इसलिए उस पर बालिग की तरह मुकदमा चलाया जाए। उन्होंने जुवेनाइल जस्टिस एक्ट में 2015 में हुए संशोधन का हवाला भी दिया। इस पर बोर्ड ने मामले को अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत मेें स्थानांतरित कर दिया।
क्या हैं संशोधित कानून
जुवेनाइल जस्टिस एक्ट में संशोधन के बाद जघन्य अपराधों में लिप्त 16 से 18 आयुवर्ग के किशोरों के लिए सजा वयस्क व्यक्ति के समान किए जाने का प्रावधान है। इसमें नाबालिग अपराधियों की उम्र-सीमा 18 वर्ष से घटाकर 16 वर्ष की गई है और जघन्य अपराधों के मामले में न्यूनतम 7 साल तक कैद का प्रावधान किया गया है।