नौ फीसदी ब्याज के साथ 3.14 लाख रुपये वापस करने का आदेश
अदालत ने बिजली विभाग का बैंक खाता अटैच किया
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। बिजली चोरी के दो अलग-अलग मामलों में स्थानीय अदालत ने फैसला सुनाते हुए एक मामले में बिजली विभाग का खाता अटैच करने का आदेश दिया है। पांच साल बाद पीड़ित को नौ फीसदी ब्याज के साथ 3.14 लाख रुपये वापस करने का आदेश दिया है। दूसरे मामले में भी आठ साल बाद जुर्माने की राशि छह फीसदी ब्याज की दर से वापस करने का आदेश दिया है।
सेक्टर-54 के रहने वाले निर्मल गुप्ता के यहां जनवरी 2018 में बिजली विभाग की टीम पहुंची और मीटर उतार लिया। मीटर से छेड़खानी करने का आरोप लगाते हुए 2.22 लाख रुपये जुर्माना ठोक दिया। निर्मल के अधिवक्ता क्षितिज मेहता ने बताया कि निर्मल ने कनेक्शन कट जाने के डर से जुर्माना जमा कर दिया। 17 सितंबर 2018 को बिजली विभाग के खिलाफ अदालत में मुकदमा भी दायर कर दिया। 22 फरवरी 2022 को जिला सिविल जज ने उपभोक्ता पर लगाए गए आरोपों को गलत बताते हुए बिजली विभाग को आदेश दिया कि वह जुर्माने की रकम 9 फीसदी ब्याज के साथ वापस करें। जब विभाग ने पैसा वापस नहीं किया तो 21 मार्च 2022 को फिर से अदालत का रुख किया। अब 24 अप्रैल 2023 को अदालत ने बिजली विभाग के एचडीएफसी बैंक में चल रहे खाते को अटैच कर दिया और बैंक को पत्र भेजा है कि वह उपभोक्ता को जुर्माने की 3.14 लाख रुपये की रकम वापस करें।
एक अन्य मामले में गांव सीही निवासी भूप सिंह के यहां पर बिजली विभाग ने 29 जून 2015 को छापा मारा। बिजली चोरी का आरोप लगाते हुए 43904 रुपये जुर्माना ठोक दिया। अधिवक्ता क्षितिज मेहता कहते हैं कि कनेक्शन कट जाने के डर से जुर्माना जमा कर दिया गया। 7 अक्टूबर 2015 को उपभोक्ता ने अदालत में मुकदमा दायर कर दिया। 3 फरवरी 2021 को अदालत ने बिजली विभाग के आरोप को गलत बताया और जुर्माने की रकम 6 फीसदी ब्याज के साथ वापस करने का आदेश दिया। विभाग ने आदेश को लेकर गंभीरता नहीं दिखाई। इसके बाद उपभोक्ता फिर से अदालत की शरण में पहुुंचा। अदालत ने बिजली विभाग को आदेश दिया कि 27 अप्रैल 2023 तक यदि उपभोक्ता को पैसे वापस नहीं किए तो उनका बैंक खाता अटैच कर दिया जाएगा। इसके बाद बिजली विभाग ने 27 अप्रैल को भूप सिंह के नाम 63919 रुपये का चेक जारी कर दिया। चेक भूप सिंह को दे दिया गया है।