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ग्रीन व्यू के आवंटियों को किराया मिलना जारी रहेगा, तय नहीं

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गुरुग्राम। सेक्टर-37 डी स्थित ग्रीन व्यू सोसाइटी के आवंटियों को एनबीसीसी ने सोसाइटी खाली करने के बाद छह महीने तक किराया देना तय किया था। बुधवार को यह छह महीने की अवधि पूरी हो रही है। आवंटियों के मुताबिक आगे किराया देने के लिए एनबीसीसी ने स्थिति स्पष्ट नहीं की है। जबकि आवंटियों को उनके फ्लैटों का रिफंड भी नहीं मिला है।
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एनबीसीसी फ्लैट की मूल रकम देने को तैयार है, जबकि आवंटी इस पैसे का ब्याज, फ्लैट की रजिस्ट्री का पैसा, इंटीरियर पर आया खर्चा आदि अन्य पैसे की भी मांग कर रहे हैं। सन 2012 में सरकार के द्वारा संरक्षित निर्माण कंपनी नेशनल बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कॉरपोरेशन ने ग्रीन व्यू के नाम से अपने प्रोजेक्ट को लांच किया। 18 एकड़ में फैले इस परिसर में 14 मंजिल के 7 टावर बनाए गए। इस सोसाइटी में कुल 784 फ्लैट हैं।
प्रोजेक्ट लांच होने के बाद 66 लाख रुपये की कीमत के फ्लैट करीब 260 लोगों ने बुक कराए। तीन साल की देरी से सन 2018 में बुक कराने वालों को फ्लैट दे दिए गए, लेकिन इसी के साथ घटिया निर्माण की शिकायतें भी आने लगीं। इसके चलते अन्य टावरों में फ्लैट बुक ही नहीं हुए।
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आईआईटी रुड़की के विशेषज्ञों ने संरचनात्मक ऑडिट के बाद यहां की टावरों को रहने के लिए असुरक्षित घोषित कर दिया और मार्च 2022 में सोसाइटी को पूरी तरह खाली करवा लिया गया।
आवंटियों की आरडब्ल्यूए के कोषाध्यक्ष दीपक जैन कहते हैं कि सभी आवंटियों ने आसपास किराए के फ्लैटों में शरण ली, जिसका किराया छह महीने तक एनबीसीसी दे रही है। बुधवार 31 अगस्त को यह समय सीमा समाप्त हो रही है लेकिन एनबीसीसी का रुख इसको लेकर साफ नहीं है।
अब नगर योजनाकार विभाग के निदेशक ने एनबीसीसी प्रबंधन को पत्र लिखकर जर्जर सोसाइटी गिराने का एक्शन प्लान मांगा है। इसे गिराने से पहले आसपास के इलाके को कैसे सुरक्षित रखा जाएगा, इसकी पूरी कार्ययोजना बनाकर विभाग को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।
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