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चिंटेल्स : निवासियों ने की किराये की मांग

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सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार पुनर्निर्माण के साथ ही किराये का भुगतान होना चाहिए
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अमर उजाला ब्यूरो

गुरुग्राम। सेक्टर 109 स्थित चिंटेल्स पैराडाइसो सोसाइटी के निवासियों ने प्रशासन से पत्राचार कर फ्लैट धारकों के लिए किराया दर निर्धारित कर किराया भुगतान कराने की मांग की है। हित धारकों का कहना है कि डी, ई, एफ,जी और एच टावरों को तोड़ने की प्राथमिक प्रक्रिया शुरू हो गई है। पहले डी टावर को तोड़ा जा रहा है।
दूसरी ओर इन टावरों को खाली करने वाले फ्लैट मालिकों को पुनर्वास तक किराये का भुगतान किया जाना है। लोग किराये पर चले गए हैं, बावजूद इसके उन्हें किराये संबंधी कोई जानकारी नहीं है। सर्वोच्च न्यायालय के आदेश अनुसार री-कंस्ट्रक्शन (पुन: निर्माण) के साथ ही किराये का भुगतान होना चाहिए। पुन: निर्माण में ढहाने भी प्रक्रिया का हिस्सा है। ऐसे में किराये का भुगतान शुरू होना चाहिए।
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आरडब्ल्यूए की ओर से प्रशासन को लिखे गए पत्र में कहा गया है कि सर्वोच्च न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) ने चार जनवरी 2024 के आदेश का संदर्भ लिया जाए। मनोज सिंह बनाम चिंटेल्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड मामले में दिए गए आदेशों में पैराग्राफ 17 का जिक्र इस पत्र में किया गया है। बिल्डर ने खाली किए गए फ्लैट के बदले दूसरे फ्लैट निर्माण के लिए विकल्प के रूप में उस साइट पर परियोजना का पुनर्निर्माण करना है। इमारत में रहने वाले हितधारकों को फ्लैट खाली करने होंगे।
हितधारकों का कहना है कि निर्माण प्लान हितधारकों के साथ साझा किया जाए। पुनर्निर्माण के प्रारंभ से लेकर प्रोजेक्ट पूरा होने तक किराये का भुगतान किया जाएगा। प्रभावित हितधारकों को उनके लिए उचित किराया दिया जाए। मंडल आयुक्त समिति किराये का निर्धारण करे। आरडब्ल्यूए ने पत्राचार में स्पष्ट किया है कि उन्होंने डी,ई,एफ,जी और एच टावर को ध्वस्त करना शुरू कर दिया है। पुनर्निर्माण प्रक्रिया में फ्लैट को ढहाना पुनर्निर्माण की दिशा में पहला कदम है। ऐसे में सुनिश्चित करें कि प्रक्रिया की शुरुआत से ही किराया निर्धारित करें। बिल्डर को प्रभावित मालिकों को किराये का भुगतान तुरंत शुरू करने का निर्देश दें।
हाल ही में चिंटेल्स इंडिया लिमिटेड ने एफएआर बढ़ाने के लिए पत्र और ईमेल भेजना शुरू किया है। यहां तक कि एक समझौता भी साझा किया है। इसमें फ्लोर एरिया रेश्यो (एफएआर) में बदलाव और कारपेट एरिया में पांच फीसदी का बदलाव करने की बात कही है। यह घोषणा पुनर्निर्माण आदेश का घोर उल्लंघन है। ऐसे में प्रशासन मामले में संज्ञान ले।


सर्वोच्च न्यायालय का आदेश है कि निर्माण प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही हित धारकों को किराया दिया जाएगा। अभी टावर तोड़ने की प्रक्रिया शुरू की गई है। ऐसे में निवासी निराधार मांग कर रहे हैं। निर्माण शुरू होने पर किराये का भुगतान किया जाएगा- जेएन यादव, उपाध्यक्ष, चिंटेल्स पैराडाइसो
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हित धारकों को किराये का भुगतान री-कंस्ट्रक्शन प्रक्रिया के अनुसार किया जाना चाहिए। अभी किराये की दर निर्धारित नहीं की गई है। न ही अभी तक पुन: निर्माण की प्लानिंग साझा की गई है। प्रशासन को इसमें हस्तक्षेप कर हित धारकों की मदद के लिए आगे आना चाहिए। - राकेश हुड्डा, आरडब्ल्यूए अध्यक्ष
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