बिफरे चिंटेल पैराडाइसो के आवंटी, सोसाइटी से सचिवालय तक प्रदर्शन
- धरने पर बैठे रहे प्रदर्शनकारियों से मिलने उनके बीच पहुंचे उपायुक्त
- पुनर्निर्माण पर मांग पर अड़े, उपायुक्त बोले-सरकार से करेंगे अनुशंसा
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। धराशायी हुए फ्लैटों के पुनर्निर्माण की मांग को लेकर सेक्टर-109 में चिंटेल पैराडाइसो के निवासियों ने शुक्रवार को सोसाइटी से लेकर लघु सचिवालय तक प्रदर्शन किया। पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार लोग सुबह 11 बजे यहां से सरकार, बिल्डर और प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए करीब एक घंटे में लघु सचिवालय पहुंचे। प्रदर्शनकारी आरआईपी एडमिनिस्ट्रेशन, वी वांट जस्टिस, ऑवर लिवस मेटर, अरेस्ट कलप्रिट्स जैसी तख्तियां लिए हुए थे। निवासियों के आने की सूचना पर उपायुक्त की गैरमौजूदगी में एसडीएम रविंद्र यादव ज्ञापन लेने पहुंचे। इन लोगों ने एसडीएम को ज्ञापन तो दे दिया, लेकिन डीसी से मिलने और लिखित में पुनर्निर्माण के आदेश लेने को लेकर धरना पर बैठ गए। एसडीएम ने तीन-चार लोगों को रुकने कर उपायुक्त का इंतजार करने की पेशकश की, लेकिन लोग नहीं माने। दोपहर 12 बजे से लेकर दो बजे के बाद तक बैठे रहे। बाद में उपायुक्त ने इन्हें बुलाया और मांग पत्र लिया। उपायुक्त ने कहा कि पुनर्निर्माण के लिए सरकार से अनुशंसा करेंगे। साथ ही डीटीपी विभाग से चर्चा की जाएगी। डीसी ने प्रदर्शनकारियों को डीटीपी विभाग से संपर्क करने की सलाह दी।
एक साल से किराए पर कट रही जिंदगी
इन लोगों को सबसे अधिक मलाल इसका था कि खुद का फ्लैट होने के बाद भी ये एक साल से किराए के मकानों में रहने को मजबूर हैं। लोगों का कहना है कि जो जांच होनी चाहिए वह नहीं हुई। एक साल को मत गिनिए, 365 दिन को जेहन में रखकर देखिए। प्रदर्शनकारियों ने सरकार और प्रशासन पर बिल्डर को संरक्षण देने का आरोप भी लगाया। तीन लोगों की मौत के बाद भी बिल्डर और प्रबंधन के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई।
तुर्किये की घटना से सहमे
चिंटेल पैराडाइसो के आवंटी तुर्किये की घटना से सहमे हैं। लोगों ने कहा कि यहां रह रहे परिवार खौफजदा है। तुर्किये की घटना ने उनके मन में एक नया डर पैदा कर दिया है। यहां मकानों में दरारें हैं। भूकंप आया तो परिवार तबाह हो जाएंगे। प्रशासन की ओर से हुई कार्रवाई सीधे तौर पर बिल्डर को संरक्षण है।
उपायुक्त ने सुनी लोगों की बात
जिस समय निवासी लघु सचिवालय पहुंचे, उस समय उपायुक्त निशांत कुमार यादव कार्यालय में नहीं थे। वह जी-20 सम्मेलन से जुड़ी एक महत्वपूर्ण बैठक में हिस्सा लेने गए गए थे। यहां एसडीएम ने ज्ञापन लिया। उन्होंने उपायुक्त की व्यस्तता के बारे में भी बताया, लेकिन जब ये लोग नहीं माने तो एसडीएम ने डीसी को अवगत किया। उपायुक्त ने एक प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की बात कही, जिसे एसडीएम ने निवासियों के सामने रखा, लेकिन सभी उपायुक्त से मिलने पर अड़े रहे। कुछ समय बाद उपायुक्त लोगों के बीच पहुंचे और उनकी बात सुनी, फिर संक्षिप्त बैठक भी की।
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जब उपायुक्त ने फ्लैटों का धराशायी करने का आदेश दे सकते हैं तो पुननिर्माण का आदेश क्यों नहीं दिया जा रहा है। इससे सरकार, प्रशासन और बिल्डर की मिलीभगत झलक रही है। -देवेंद्र, निवासी डी टॉवर
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आज तक बिल्डर और प्रबंधन के खिलाफ काई कार्रवाई नहीं हुई। इसका सीधा मतलब है कि बिल्डर को सरकार से संरक्षण मिला है। लोगों की परेशानी से सरकार को कुछ लेना-देना नहीं। - विजय, निवासी डी टॉवर
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प्रबंधन पुनर्निर्माण के लिए तैयार है, लेकिन उससे पहले प्रशासन को आदेश करना चाहिए। कितनी ही बार प्रदर्शन कर चुके हैं। यहां आते, दो दिन का आश्वासन मिलता है और होता कुछ नहीं। - नेहा जैन
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पूरे मामले की जांच भी सलीके से नहीं की गई। महज औपचारिकता कर एडीसी ने जांच पूरी कर ली। एक साल से किराए के मकानों में जिंदगी काट रहे हैं। - प्रिया, निवासी ई टॉवर
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हमें अपने घर से बेघर कर दिया गया। किराए पर कब तक रहेंगे। कितने दिनों से रिकंस्ट्रक्शन की मांग कर रहे हैं, लेकिन प्रशासन आदेश नहीं कर रहा। - राकेश आरडब्ल्यूए अध्यक्ष
निष्पक्ष सुलझाना चाहते हैं मामला : चिंटेल प्रबंधन
चिंटेल्स प्रबंधन के उपाध्यक्ष जेएन यादव ने कहा कि आज उस दुखद घटना की पहली बरसी है, जिसमें दो महिलाओं की जान चली गई थी। एक बार फिर उनके परिवारों के प्रति हमारी गहरी संवेदना है। हम अन्य निवासियों के दर्द और पीड़ा को भी समझते हैं और मामले को निष्पक्ष रूप से सुलझाना चाहते हैं। मुआवजे की दिशा में डी-003, डी-103, डी-503, डी-204, डी-203 और डी-001 के मालिकों के साथ निपटारा कर चुके हैं। कुछ अन्य परिवारों के साथ भी बात चल रही है। हम सीधे टावर-डी के अन्य मालिकों के साथ समझौते पर चर्चा करने को तैयार हैं। हम पहले ही दो मुख्य प्रभावित पार्टियों अरुण श्रीवास्तव और राजेश भारद्वाज के साथ समझौता कर चुके हैं, जिन्होंने इस घटना में पत्नियों को खो दिया। भारद्वाज, हालांकि एक किरायेदार थे लेकिन हमने मानवीय दृष्टि से मामले का निपटारा किया।