संवाद न्यूज एजेंसी
नूंह। नूंह में पिछले चार दिनों से चल रहे तोड़- फोड़ अभियान को लेकर हाईकोर्ट ने हस्तक्षेप किया है। जिसके बाद जिले में तोड़-फोड़ अभियान रोका गया। उपायुक्त धीरेंद्र खड़गटा ने संबंधित अधिकारियों को अवैध निर्माण रोकने के आदेश दिए हैं। जिला प्रशासन का कहना है कि हाईकोर्ट के आदेशों के अनुपालना करते हुए जिले में तोड़फोड़ अभियान में रोका गया। प्रशासन पिछले 4 दिन से लगातार अवैध निर्माण व दंगे में शामिल लोगों द्वारा इस्तेमाल की गई बिल्डिंग्स पर यह कार्रवाई ताबड़तोड़ कर रहा था। यह कार्रवाई नूंह में ही नहीं बल्कि तावडू, नूंह, नगीना, फिरोजपुर झिरका सहित कई गांव में की गई है। इसको लेकर लोगों में रोष था और लोग लगातार प्रशासन से इस कार्रवाई को रोकने की मांग कर रहे थे । इतना ही नहीं इतना ही नहीं कुछ लोगों ने आरोप लगाया था कि यह कार्रवाई प्रशासन ने किसी नोटिस दिए बिना की है। जो बिल्कुल गलत है। प्रशासन ने ऐसे दुकान व मकानों को तोड़ दिया जो किसी भी तरीके से अवैध नहीं थे। लेकिन प्रशासन ने जबरन उनके साथ गलत किया है। वही प्रशासनिक अधिकारियों का दावा था कि यह मकान व दुकान अवैध रूप से बनाई गई बिल्डिंग तथा दंगे में प्रयोग में लाई गई थी। इसलिए इन पर प्रशासन का बुलडोजर चला है ।लेकिन फिलहाल इस पर हाईकोर्ट के आदेशों के अनुसार रोक लगा दी गई है बता दें कि 31 जुलाई को मुंह में हिंसा हुई थी । उसके बाद प्रशासन की यह बुलडोजर कार्यवाही शुरू हुई जिसमें जिले में रविवार की कार्यवाही मिलाकर कुल 37 स्थानों पर 57.5 एकड़ भूमि से अवैध निर्माण हटाया गया है। जिला में अब तक 162 स्थाई तथा 591 कच्चे स्ट्रक्चर धराशायी किए गए हैं।