नई दिल्ली। विश्व पुस्तक दिवस के अवसर पर द्वारका स्थित साहित्य परिक्रमा कार्यालय में पंच परिवर्तन पुस्तक पर विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें साहित्यकारों, शिक्षाविदों, विचारकों और युवाओं ने भाग लिया। मुकुल कानिटकर की लिखित पुस्तक पंच परिवर्तन पर चर्चा के दौरान परिवार, सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण, राष्ट्रीय कर्तव्य और स्व-बोध जैसे विषयों पर मंथन हुआ। मुख्य वक्ता मनोज कुमार ने कहा कि यह पुस्तक वैश्विक कल्याण की सोच प्रस्तुत करती है। संवाद से ही संबंध और समाधान विकसित होते हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय की प्रो. पूनम राठी ने परिवार को संस्कारों की पहली पाठशाला बताया। वहीं, प्राचार्या प्रो. नीलम राठी ने सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय कर्तव्यों को जीवन में उतारने की आवश्यकता बताई। संवाद