शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से बढ़ जाते हैं दर्शनार्थी, गुप्त नवरात्र भी शुरू, मंदिर प्रबंधन ने की तैयारियां
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। आषाढ़ के पहले दिन चार जून से माता शीतला मंदिर में आषाढ़ मेला शुरू हुआ था मगर शुक्ल पक्ष से मेले में भक्तों की संख्या बढ़ेगी। आषाढ़ के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से माता शीतला के दर्शनार्थी बढ़ जाते हैं। इस दिन गुप्त नवरात्र भी शुरू हो जाते हैं। मंदिर के अधिकारी यज्ञ दत्त शर्मा ने बताया कि आषाढ़ के शुक्ल पक्ष में 15 दिनों तक माता के भक्त यहां दर्शन पूजन के लिए पहुंचते हैं। खास तौर पर रविवार से मंगलवार तक भक्तों की काफी भीड़ रहती है। मंदिर प्रबंधन ने इसकी तैयारियां की है। मंदिर में दर्शन के लिए 24 घंटे माता का दरबार इस दौरान खुला रखा जाता है।
गुप्त नवरात्र सोमवार को शुरू होेंगे
सोमवार 19 जून से गुप्त नवरात्र भी शुरु होने जा रहे हैं, जिसमें श्रद्धालु अपनी मनोकामना की सिद्धि के लिए मां की उपासना करेंगे। महाकाल संहिता और अन्य ग्रंथों में चारों नवरात्रों का महत्व बताया गया है। ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि गुप्त नवरात्र से विशेष कामनाओं की सिद्धि की जाती है। कुछ ही लोगों को इसके बारे में जानकारी होने और इसके पीछे छिपे रहस्यमयी कारणों की वजह से ही इन्हें गुप्त नवरात्र कहते हैं। उनका कहना है कि ये गुप्त नवरात्र आगामी 27 जून को संपन्न होंगे। गुप्त नवरात्र में साधक मां दुर्गा के 9 स्वरूपों की 9 रात्रि पर्यंत साधना करते हैं और कुछ साधक अत्यधिक शक्ति व वर्चस्व के लिए 10 महा विद्याओं की पूजा-अर्चना भी करते हैं। माना जाता है कि गुप्त नवरात्र अमोघ शक्ति और अखंड पुण्य प्रदान करते हैं। साधक गुप्त रूप से शाम में अपने ही स्थान पर मां भगवती के विभिन्न स्वरूपों की पूजा-अर्चना कर सुख-निरोगी व दीर्घायु और मानव कल्याण की शांति की कामना भी करते हैं।
उनका कहना है कि साधक 10 महाविद्यायाओं में मां काली, भूनेश्वरी माता, त्रिपुरु सुंदरी, छिन्नमस्तिका माता, बगलामुखी देवी, कमलादेवी, त्रिपुर भैरवी माता, तारा देवी, धुमावती मां व मातंगी की पूजा-अर्चना भी करते हैं। सामान्य नवरात्र में आमतौर पर सात्विक व तांत्रिक दोनों ही प्रकार की पूजा होती है, लेकिन गुप्त नवरात्र में अधिकतर तांत्रिक पूजा ही की जाती है। ज्यादा प्रचार-प्रसार नहीं किया जाता। बल्कि अपनी साधना को गोपनीय रखा जाता है।