फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Gurugram News: अस्पतालों में अलर्ट, इमरजेंसी वार्ड में बढ़ी ऑक्सीजन बेड की मांग

विज्ञापन
विज्ञापन
दूषित गैस का चैंबर बनने लगा है गुरुग्राम, दिवाली तक सतर्क रहने की सलाह
विज्ञापन

विशेषज्ञ लोगों को एन-95 मास्क पहनकर ही बाहर निकलने की दे रहे सलाह
मूर्ति दलाल
गुरुग्राम। साइबर सिटी की दूषित हवा से लोगों की जान पर बन आई है। एक्यूआई का स्तर बेहद खराब स्थिति में पहुंच गया है। शुक्रवार को भी दिन भर आसमान में स्मॉग छाया रहा। हवा में घुले स्मॉग (धुंध और धूल का गुबार) के कारण अस्पतालों के इमरजेंसी वार्ड में ऑक्सीजन बेड की मांग बढ़ गई है। सांस, संक्रमण और अनीमिया के मरीज इमरजेंसी हालात में अस्पताल पहुंच रहे हैं। मौजूदा स्थिति को विशेषज्ञ स्वास्थ्य का आपातकाल मान रहे हैं। शहर के अलग-अलग निजी अस्पताल अलर्ट मोड पर हैं। बीते तीन दिनों में स्थिति ज्यादा बिगड़ी है। विशेषज्ञ लोगों को एन-95 मास्क पहनकर ही बाहर निकलने की सलाह दे रहे हैं।
मौजूदा समय में जिले का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) बेहद खराब स्थिति में है। शुक्रवार को भी ग्वाल पहाड़ी, टेरी विलेज, विकास सदन, सेक्टर 51 सभी क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता बेहद खराब रही। इसमें पीएम 2.5 मुख्य प्रदूषक तत्व रहा। अलग अलग स्वास्थ्य विशेषज्ञ इसके त्वरित और दूरगामी घातक प्रभावों का विश्लेषण कर रहे हैं।
विज्ञापन

सिविल सर्जन डॉ. वीरेंद्र यादव ने बताया कि पूरे एनसीआर में एक्यूआई का स्तर बिगड़ रहा है। अस्पतालों में सांस के रोगी बढ़े हैं। पहले से क्रोनिक बीमारियों से जूझने वाले मरीजों को बदलते मौसम में यह परेशानी होती है। किसी भी परेशानी में लोग तुरंत अपने डॉक्टर से परामर्श करें। लापरवाही न बरतें। नारायणा के इंटरनल मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. पंकज मिश्रा बताते हैं कि फेफड़े, एलर्जी, मधुमेह,अनीमिया, स्किलिंग, एचआईवी पीड़ितों के लिए यह हालात स्वास्थ्य इमरजेंसी जैसे हैं। ऐसे हालात में ज्यादातर मरीज भर्ती करने की नौबत आ रही है। साधारण फ्लू पीड़ितों को स्वास्थ्य होने में समय लग रहा है। कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले मरीजों में लॉ ग्रेड क्रॉनिक सिचुएशन के कारण ब्रॉनकाइटिस यानी सांस की नली में सूजन, दिल के रोग, फेफड़ों का कैंसर जैसी बीमारी होने की स्थिति होने की भी आशंका बढ़ी है।
मैक्स अस्पताल के मेडिकल एडवाइजर डॉ आशुतोष ने बताते हैं कि मौजूदा ओपीडी में 30 फीसदी रोगी अस्थमा, क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज यानी सीओपीडी से पीड़ित हैं। यह ऐसे मरीज हैं जिनके फेफड़े सिकुड़ गए हैं। इमरजेंसी में ऐसे मरीज भर्ती करने की नौबत आ रही है। ऐसे मरीजों को ऑक्सीजन, नेबुलाइजर देकर मेटाबॉलिज्म स्थिर करने की जरूरत पड़ रही है। ऐसी स्थिति में अस्पताल अलर्ट पर है। लगातार स्थिति का अवलोकन किया जा रहा है। जरूरत पड़ने पर कोई भी बदलाव करने या जरूरी निर्णय लागू करने के लिए भी पूरी तरह से प्रबंधन तैयार है।
मणिपाल अस्पताल के डॉ. अमिताभ घोष ने बताया कि बीते 24 घंटों में 15 मरीज सांस की समस्या से जूझते हुए अस्पताल ओपीडी में पहुंचे। इसमें से चार को भर्ती करना पड़ा। दो को ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखा गया है। दिवाली के दौरान आतिशबाजी हवा में और जहर घोल सकती है। ऐसे में लोगों को अपने स्तर पर पूरी तरह से सतर्क रहना होगा।
विज्ञापन

फोर्टिस अस्पताल के इमरजेंसी विशेषज्ञ डॉ. कुलराज ने बताया कि सांस के रोगियों को प्रदूषण के कारण अचानक अस्थमा का गंभीर अटैक आ रहा है। ऐसे मरीज इमरजेंसी में पहुंच रहे हैं। हर दिन ऐसे चार से पांच मरीज अस्पताल पहुंच रहे हैं। ऐसे दो मामलों को भर्ती करने की नौबत आ रही है। इसके अलावा हद्य रोगियों की संख्या भी बढ़ी है।

आपातस्थिति से बचने के लिए करें यह उपाय

घर से बाहर निकलते वक्त एन-95 मास्क पहनें, साधारण कपड़ा प्रदूषक कण नहीं रोक सकेगा।
अधिक तरल पदार्थ का सेवन करें, शरीर में पानी की कमी न होने दें।
खान पान का ध्यान रखें। हेल्दी डाइट जरूर खाएं।
रात को दूध में हल्दी डालकर पीएं।
फ्लू और निमोनिया वैक्सीन लगवाएं।
श्वास लेने में परेशानी होने पर तुरंत विशेषज्ञ से परामर्श लें।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें