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Gurugram News: हवा साफ करने के लिए लगाए गए एयर प्यूरीफायर बन गए हैं शोपीस

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42.60 लाख खर्च करने के बाद भी साइबर सिटी के लोग ले रहे दूषित हवा में सांस
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विवेक कुमार सिंह
गुरुग्राम। शहर की हवा को दुरुस्त करने के लिए साइबर सिटी के विभिन्न इलाकों में लगाए गए एयर प्यूरीफायर को ही अब दुरुस्त करने की जरूरत महसूस हो रही है। जीएमडीए द्वारा शहर में लगवाए गए 71 एयर प्यूरीफायर उपकरणों में से ज्यादातर बद बंद पड़े हैं। 42.60 लाख खर्च करके 2020 में लगवाए गए कई एयर प्यूरीफायर में तो आज तक बिजली कनेक्शन तक नहीं हो पाया, जबकि इनमें प्रत्येक के रखरखाव पर ही जीएमडीए ने 18 हजार रुपये सालाना खर्च किए जाने की बात कही थी।
जीएमडीए ने नवंबर 2020 में प्रोजेक्ट एयर केयर की शुरुआत की थी। इसके अंतर्गत शहर के अत्यधिक वायु प्रदूषण वाले इलाकों में 71 विंड ऑग्मेंटेशन एयर प्यूरीफायर लगाए गए थे। उस समय एक उपकरण की कीमत 60 हजार रुपये बताई गई थी। यानी की कुल 71 उपकरणों पर 42 लाख 60 हजार रुपये खर्च किए गए। मौजूदा समय में जब इन प्यूरीफायर की सबसे ज्यादा आवश्यकता है, तब पता चला है कि इनमें से एक भी काम नहीं कर रहा है। वायु प्रदूषण से निपटने के लिए लगाई गई इन मशीनों के संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी जीएमडीए की थी। संचालन तो दूर रखरखाव पर भी ध्यान नहीं दिया जा रहा है। रखरखाव के अभाव के कारण में अमर उजाला की पड़ताल में कुछ उपकरण क्षतिग्रस्त भी पाए गए।
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जीएमडीए से मिली जानकारी के अनुसार, एक उपकरण के रखरखाव और संचालन का खर्च 18 हजार रुपये सालाना है। इस तरह वर्ष में 71 एयर प्यूरीफायर मशीनों का रखरखाव खर्च 12.78 लाख है। इसके बावजूद वायु एयर प्यूरीफायर बंद पड़े हैं। वर्ष 2020 में प्रोजेक्ट एयर केयर की शुरुआत के समय जीमएडीए द्वारा जोर-शोर से इसका प्रचार किया गया था। जबकि अब जीएमडीए के अधिकारी इस पर बात भी नहीं करना चाहते। सोहना रोड पर खड़े ऑटो चालक सुरेश का कहना था कि आज से पहले उन्होंने लगाता था कि प्राधिकरण वायु प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए कदम तो उठा रहा है, लेकिन उन्हें आज पता चला यह वायु उपकरण केवल शो पीस मात्र हैं। अधिकांश मशीनों का तो जब से लगी हैं, तब से बिजली कनेक्शन ही नहीं हुआ।
लाखों खर्च के बाद भी पूरा नहीं हुआ मकसद
पर्यावरणविद् आनंद आर्य का कहना है कि जिस मकसद से यह उपकरण लगाए गए थे, वह पूरा नहीं हो रहा है। इससे बेहतर होता कि अगर यही पैसा पेड़ लगाने में खर्च किया होता। जब यह उपकरण लगाए गए थे, तब कुछ उम्मीद जगी थी कि शहर के वायु प्रदूषण में कुछ गिरावट आएगी, लेकिन घटने की बजाय 2020 से अब तक वायु की गुणवत्ता लगातार दूषित हुई है। यह दिखता है कि प्राधिकरण की ओर से प्रदूषण से निपटने के लिए केवल खानापूर्ति की जाती है, जिसका नतीजा आज सबसे सामने है।

जहरीली गैस को सोखना है काम
यह उपकरण हवा में मौजूद वायु प्रदूषकों और सक्रिय तत्वों को साफ करती है। इनमें पार्टिकुलेट मैटर और एक्टीवेटेड कार्बन यानी चारकोल और अल्ट्रा वायलेट लैंप्स लगे हैं, जो जहरीली गैसों जैसे कार्बन मोनोक्साइड को सोख लेते हैं। अफसोस इस बात का है कि शहर में लगे यह उपकरण ज्यादातर बदहाल हालत में हैं।
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आधी यूनिट बिजली ही होती है खर्च
यह वायु उपकरण पर्यावरण फ्रेंडली हैं, दस घंटे में केवल आधा यूनिट बिजली ही खर्च होती है। इसके बावजूद इन मशीनों का बिजली कनेक्शन नहीं कराया गया। लाेगों का कहना है कि आज यह उपकरण काम कर रहे होते तो, शहर में दूषित वातावरण के कारण हालात इतने खराब नहीं होते।
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