गुरुग्राम। अग्रवाल धर्मशाला में चल रहे दुर्लभ सत्संग में शुक्रवार को भजन संध्या के साथ शुरुआत हुई। इसके बाद विजयानंद गिरी स्वामी ने प्रवचन दिए। उन्होंने कहा कि मनुष्य जीवन में अशांति का मुख्य कारण उसकी कामनाएं हैं। जब व्यक्ति अपनी अपेक्षाओं और इच्छाओं के अनुसार जीवन की परिस्थितियों को ढालना चाहता है, तभी दुख और असंतोष जन्म लेता है। सच्ची शांति तभी मिल सकती है जब इंसान कामनाओं का त्याग कर दें। ईश्वर की इच्छा को जो जैसा है उसे वैसा स्वीकार करने की भावना से अपना लें तो शांति मिलेगी। उन्होंने यह भी कहा कि भक्ति और साधना ही आत्मा को निर्मल करती है तथा सच्चे सुख का मार्ग प्रशस्त करती है। संवाद