समय पर माल तैयार नहीं होने से निर्यात के ऑर्डर भी हुए प्रभावित
श्रमिकों की संख्या में 30 फीसदी तक की कमी
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। लगेगी आग तो आएंगे घर कई जद में, यहां पर सिर्फ हमारा मकान थोड़ी है।... शायर राहत इंदौरी की यह पंक्तियां नूंह में पिछले दिनों भड़की हिंसा के बाद के माहौल को बयां कर रही हैं। पड़ोसी जिले की आग से गुरुग्राम की औद्योगिक इकाइयों पर जबरदस्त प्रभाव पड़ा है। कारोबार जगत के जानकारों की मानें तो अनुमान है कि पिछले पांच दिनों में करीब 500 करोड़ रुपये तक का नुकसान हुआ है। इसमें दूसरे देशों को निर्यात किए जाने वाले ऑर्डर भी शामिल हैं। कारीगरों के न होने से माल समय से तैयार नहीं हो सका।
मानेसर, सोहना और गुरुग्राम की औद्योगिक इकाइयों में 30 फीसदी तक श्रमिकों की संख्या में कमी आई है। इसमें मानेसर की रेडीमेट गारमेंट उत्पादन, यूनानी दवाओं के प्रोडक्ट, मशीनरी उत्पादन शामिल हैं। यहां से दूसरे देशों में निर्यात होने वाले आर्डर भी प्रभावित हुए हैं, क्योंकि समय पर माल तैयार नहीं हुआ। मानेसर की औद्योगिक इकाइयों में ज्यादातर कर्मी बाहर से ही हैं। नूंह की घटना के बाद श्रमिकों में असहजता है।
एक कारीगर का काम दूसरे से जुड़ा है
आईएमटी इंडस्ट्रियल एसोसिएशन के महासचिव मनोज त्यागी कहते हैं कि यह कहना कि कुछ प्रभाव नहीं पड़ा, सही नहीं होगा। यहां की औद्योगिक ईकाइयों में सभी वर्गों के कारीगर काम करते हैं। एक कारीगर के काम से दूसरे कारीगर का कम जुड़ा हु्आ है। अगर एक कारीगर गैर हाजिर रहता है तो इससे उत्पादन की पूरी बेल्ट प्रभावित होती है। यहां सबसे ज्यादा प्रभाव रेडीमेड गारमेंट के काम पर पड़ा है।
सोहना के उद्यमियों ने पलायन रोकने की मांग की
गुरुग्राम। मानेसर के अलावा सोहना के औद्योगिक क्षेत्र रोजका मेव और आईएमटी में श्रमिकों के पलायन करने पर उद्योग जगत ने चिंता जाहिर की। मेवात चेंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज एसोसिएशन ने पिछले दिनों सुरक्षा बढ़ाने और पलायन रोकने की मांग को लेकर उपायुक्त और श्रम आयुक्त को पत्र लिखा। इसके अलावा उद्यमियों ने ड्यूटी मजिस्ट्रेट राजेश्वर मुदगिल, श्रम आयुक्त हवा सिंह के साथ बैठक भी की। इसमें श्रमिकों की सुरक्षा और उनके पलायन को रोकने की मांग की गई। पलायन को रोकने के लिए सरकार से कदम उठाने के लिए आग्रह के साथ क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर पुलिस गश्त बढ़ाने की मांग की।