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Gurugram News: 3 सगे भाई-बहनों ने पास की जेईई परीक्षा

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गणित में अच्छी पकड़ होने के कारण चुना आईआईटी
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गांव बीवां में रहता है इंजीनियर शीलवंत का परिवार
आस्था ने जेईई एडवांस में 1280 रैंक, अंजलि ने 742 व उत्तम 1012 रैंक हासिल किया
राजूद्दीन जंग
नगीना/बीवां। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान से इंजीनियरिंग करने का सपना प्रत्येक वर्ष लाखों विद्यार्थी देखते हैं, लेकिन उनमें से केवल हजारों की संख्या में विद्यार्थी इस प्रतिष्ठित संयुक्त प्रवेश परीक्षा को पास कर पाते हैं। नीति आयोग के सबसे पिछड़े जिले नूंह के गांव बीवां की निवासी आस्था ने जेईई एडवांस में 1280 रैंक प्राप्त की है। इससे पहले उनकी बहन अंजलि ने 742 और भाई उत्तम 1012 रैंक हासिल कर कीर्तिमान स्थापित किया। जिले का यह पहला मामला है, जब एक ही परिवार के तीन सगे भाई-बहनों ने इतना बड़ा कारनामा किया हो। तीनों सगे भाई-बहनों की प्रारंभिक शिक्षा गांव बीवां के स्कूल से हुई है और आगे की पढ़ाई पलवल जिले से हुई है। बल्लभगढ़ में इनके पिता शीलवंत एक मल्टीनेशनल कंपनी एवर इंडिया में सहायक प्रोडक्शन प्रबंधक के पद पर कार्यरत हैं। आस्था को उम्मीद है कि उनका दाखिला किसी बड़ी आईआईटी में आसानी से हो जाएगा। अंजलि फिलहाल आईआईटी हैदराबाद से इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रही हैं तो उत्तम कुरुक्षेत्र से इंजीनियरिंग के अंतिम पड़ाव पर है। अभी शीलवंत का परिवार गांव बीवां में रहता है, वो प्राइवेट नौकरी होने के कारण बल्लभगढ़ में रहते हैं। उन्होंने उच्च शिक्षा दिलाने के लिए अपने बच्चों को पलवल में पढ़ाया है। बातचीत में अंजली व उनके पिता शीलवंत ने बताया कि उन्होंने भी इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। उनके बच्चे गणित में तेज हैं, इसलिए तीनों ने 11वीं और 12वीं में गणित की पढ़ाई पर अधिक ध्यान दिया। यही कारण रहा कि कड़ी मेहनत करते हुए तीनों बच्चों ने देश की प्रतिष्ठित संयुक्त प्रवेश परीक्षा उत्तीर्ण की। वो कहते हैं कि उनका दामाद भी इंजीनियर है, उनकी बड़ी बेटी निरमा स्नातक है जिसकी शादी हो चुकी है। आस्था, अंजलि व उत्तम की मां गजना देवी केवल साक्षर हैं। गांव बीवां की अंजूबाला सरपंच ने बताया कि उनके परिवार के तीन बच्चे जेईई परीक्षा पास कर चुके हैं। मास्टर चतुर्भुज ने बताया कि मेवात के लिए इससे बड़ी खुशखबरी क्या हो सकती है कि यहां कितने पिछड़ेपन के बावजूद बच्चे अपनी प्रतिभा का लोहा देश में मनवा रहे हैं।
कैप्शन: इंजीनियर शीलवंत का परिवार व आस्था, अंजलि व उत्तम
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