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Ground Report West Delhi : साहिबी नदी की बात क्यों नहीं करते....जिससे मिलकर यमुना भी बन जाती है नाला!

विनोद डबास, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Thu, 18 Apr 2024 05:45 AM IST

सार

हार-जीत का सबका अपना आकलन था। भाजपा और आप के हक में समीकरण बन रहे थे तो बिगड़ भी रहे थे।
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वजीराबाद सिग्नेचर ब्रिज के पास यमुना में मिलती साहिबी... - फोटो : अमर उजाला


भूप सिंह भी सूरजभान की हां में हां मिलाते हुए कहते हैं, ‘भाई तू कह तो ठीक रहा सै। साबी के ठीक हुए बिना न पानी साफ मिलेगा, न हवा। खेती भी नहीं हो सकेगी बिन इसके। गांवों की बर्बादी का राज साबी की बदहाली में छिपा है और यमुना का भी।’ 


ठेठ हरियाणवी अंदाज में चल रही बातचीत के मूल में दिल्ली की साहिबी नदी थी, जो नजफगढ़ नाले के नाम से भी जानी जाती है और दिल्ली में इससे मिलने के बाद यमुना भी नाला बन जाती है। इसकी वजह भी है। राजस्थान से चलकर हरियाणा होती हुई दिल्ली में साहिबी इसी इलाके में दाखिल होती है। कभी इसके पानी से ही दिल्ली देहात के गांवों में सिंचाई का काम होता था। भूजल ठीक रखने का भी यह जरिया थी और आगे दिल्ली को दो बराबर भागों में बांटती हुई यह वजीराबाद में यमुना में मिल जाती थी। 


चार दशक पहले नदी के ऊपरी हिस्से का पानी ठीक था। इसके बाद यह नाले में तब्दील हो गई है। यमुना सबसे ज्यादा गंदी इससे होती है। साहिबी नदी प्रत्यक्ष व परोक्ष तौर पर पूरी पश्चिमी दिल्ली पर असर डालती है। कभी भूजल स्तर को बढ़ाने वाली यमुना की यह सहायक नदी आज नाला बन गई है। इसे ठीक करने के लिए कई योजनाएं बनीं, लेकिन अभी तक जमीन पर असर नहीं दिख रहा है। इस कारण लोकसभा चुनाव से पहले इसकी चर्चा आम है।


पॉश कॉलोनियों व देहात का मिश्रण

पश्चिमी दिल्ली का बड़ा हिस्सा दिल्ली देहात को समेटे हुए है। बाकी दिल्ली से यहां की समस्याएं जुदा हैं। अनधिकृत कालोनी के साथ द्वारका जैसी पॉश कालोनियां भी हैं। जनकपुरी पॉश काॅलोनी में भी बड़ी संख्या में लोग रहते हैंं। मादीपुर व बक्करवाला गांव स्थित जेजे काॅलोनी भी बसा रखी है। 

  • वहीं, तिलक नगर व राजौरी गार्डन में शहरी इलाके की विख्यात मार्केट है, जबकि ग्रामीण इलाके के निवासियों की नजफगढ़ मार्केट पहली पसंद है। 

कांटे का मुकाबला


पश्चिम दिल्ली क्षेत्र से पिछले दो चुनावों में भाजपा के प्रवेश वर्मा जीते थे, लेकिन इस बार भाजपा ने टिकट काट दिया और प्रदेश भाजपा की महामंत्री व पार्षद कमलजीत सहरावत को टिकट दिया है, जबकि आप महाबल मिश्रा को चुनाव लड़वा रही है। 

  • महाबल मिश्रा कांग्रेस से आप में आए हैं। वे इस क्षेत्र से कांग्रेस के सांसद रह चुके हैं। दोनों उम्मीदवारों को राजनीति का अच्छा खासा अनुभव है। उनकी पृष्ठभूमि वाले मतदाताओं की संख्या भी करीब-करीब बराबर है। लिहाजा, उनके बीच कांटे का मुकाबला है।

प्रमुख समस्याएं


साहिबी नदी की समस्या के अलावा कई इलाकों में पेयजल संकट है और कुछ में गंदे पानी की आपूर्ति होती है। सीवर की स्थिति भी खराब है और बरसाती पानी की निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं है। हल्की सी बारिश होने पर कई इलाकों में जलभराव हो जाता है। मुख्य सड़कों पर अतिक्रमण है और अंदरूनी सड़कें टूटी हैं। इस कारण इलाके में दिनभर जाम की स्थिति बनी रहती है। सड़कों पर जगह-जगह कूड़ा रहता है। पंखा रोड पर चारों ओर कूड़ा फैला रहता है। पार्किग की भी समस्या है।
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विधानसभा क्षेत्रों में काम करने वाले फैक्टर

  • नजफगढ़ : जाट
  • मटियाला व उत्तम नगर : जाट, ब्राह्मण व पूर्वांचली
  • विकासपुरी व द्वारका : जाट व पूर्वांचली
  • जनकपुरी : पंजाबी व पूर्वांचली
  • तिलक नगर, हरीनगर व राजौरी गार्डन : सिख व पंजाबी
  • मादीपुर : अनुसूचित जाति

क्षेत्र का इतिहास


पश्चिमी दिल्ली क्षेत्र वर्ष 2007 में लोकसभा क्षेत्रों का परिसीमन करने के दौरान अस्तित्व में आया था। इससे पहले बाहरी व दक्षिण दिल्ली लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा था। बाहरी दिल्ली क्षेत्र से नजफगढ़, विकासपुरी, मटियाला, द्वारका, उत्तम नगर व मादीपुर इलाके आए हैं। वहीं, दक्षिण दिल्ली क्षेत्र से जनकपुरी, हरी नगर, तिलक नगर व राजौरी गार्डन इलाके शामिल किए गए।


इस बार के उम्मीदवार

महाबल मिश्रा

पूर्वांचली नेता के तौर पर पहचान बना चुके महाबल मिश्रा इस बार आप के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं। इससे पहले तीन बार कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ चुके हैं। इस दौरान वर्ष 2009 में ही जीते थे, जबकि वर्ष 2019 व 2024 में हार का सामना करना पड़ा था। वर्ष 1997 में महाबल पार्षद बने थे।


कमलजीत सहरावत

प्रदेश संगठन में विभिन्न पदों पर काम करने के अलावा वर्तमान में प्रदेश भाजपा की महामंत्री कमलजीत सहरावत ने विधायक का चुनाव लड़ने के साथ राजनीति में कदम रखा था, लेकिन वर्ष 2008 में पहले चुनाव में हार गईं थीं। इसके बाद वर्ष 2017 में दक्षिण दिल्ली निगम की महापौर व नेता सदन भी रहीं। उन्होंने वर्ष 2022 में एक बार फिर पार्षद का चुनाव जीता। राष्ट्रीय पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ने वाली दिल्ली की पहली ग्रामीण महिला हैं।

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