दरअसल, दूसरी संसदीय सीटों की तरह दक्षिणी दिल्ली में भी मुकाबला भाजपा और आप के बीच है। दोनों दलों के प्रत्याशी इस वक्त दिल्ली विधानसभा के सदस्य हैं। रामवीर सिंह बिधूड़ी बदरपुर विधानसभा का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं व सहीराम तुगलकाबाद का। बिधूड़ी सदन में नेता प्रतिपक्ष भी हैं। दिलचस्प यह कि करीब दस फीसदी गुर्जर मतदाताओं वाली इस सीट पर टक्कर गुर्जर प्रत्याशियों के बीच ही है। आप व भाजपा प्रत्याशी गुर्जर समाज से ही ताल्लुक रखते हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि मुकाबला टक्कर का होगा।
जनसंख्या बढ़ी सुविधाएं नहीं
दक्षिणी दिल्ली में जनसंख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन सुविधाएं जस की तस हैं। क्षेत्र में घूमने पर लोगों से पता चला कि तीन से चार दशक पहले कॉलेज की जो संख्या थी आज भी वही हैं। जबकि इनमें पढ़ने वाले छात्रों की संख्या बढ़ गई है। क्षेत्र में कोई बड़ा अस्पताल नहीं है। इलाज के लिए लोगों को नई दिल्ली व दूसरे लोकसभा क्षेत्र जाना पड़ता है। खेल की बात करें तो पूरे लोकसभा क्षेत्र में स्टेडियम तक नहीं है, जबकि दक्षिणी दिल्ली के खिलाड़ी पदक जीतने के लिए दिन-रात मेहनत कर रहे हैं।
प्रमुख समस्याएं
लोकसभा क्षेत्र में बात करें तो लगभग हर सड़क पर जाम की स्थिति है। एमबी रोड पर लगने वाला जाम रोजाना घंटों लोगों को परेशान करता है। क्षेत्र के देवली, संगम विहार, छतरपुर एक्सटेंशन, आया नगर एक्सटेंशन, महरौली एक्सटेंशन, घिटोरनी एक्सटेंशन सहित अन्य कॉलोनियों में सीवर, सड़क, नाली, साफ-सफाई जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। कालकाजी, गोविंदपुरी, अंबेडकर नगर, महिपालपुर, पालम सहित अन्य क्षेत्रों में पार्किंग की समस्या सबसे बड़ी है। आए दिन इसे लेकर क्षेत्र में झगड़े होते हैं। इसी क्षेत्र में दिल्ली का सबसे बड़ा हरित क्षेत्र है।
बीते चुनाव की स्थिति
बीते लोकसभा चुनाव में इस सीट पर करीब 2067310 मतदाता थे और लोकसभा चुनाव में 1214545 मत पड़े थे। मत प्रतिशत 58.75 फीसदी रहा था। इसमें रमेश बिधूड़ी को 687014 वोट मिले थे। राघव चड्ढा को 319971 और विजेंदर सिंह को 164613 वोट मिले थे। राघव चड्ढा इस समय आप से राज्यसभा सांसद हैं, जबकि विजेंदर सिंह ने हाल ही में भाजपा में आए हैं।
ऐतिहासिक इमारतों से पहचान
दक्षिणी दिल्ली लोकसभा क्षेत्र में बनी ऐतिहासिक इमारतें इसे पहचान देती हैं। क्षेत्र में स्थित तुगलकाबाद का किला, कुतुब मीनार, नीली झील सहित दूसरे इमारत लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र हैं। वहीं, दक्षिणी दिल्ली को रफ्तार देने के लिए मेट्रो की येलो, वायलेट, मजेंटा, पिंक लाइन क्षेत्र में दौड़ रही है। आने वाले दिनों में मेट्रो की सिल्वर लाइन और रैपिड रेल नई गति देगी। हालांकि, क्षेत्र में लास्ट माइल कनेक्टिविटी की बात करें तो फीडर बसों का अभाव है।
भाजपा ने बदला प्रत्याशी
फिलहाल दक्षिणी दिल्ली लोकसभा सीट पर भाजपा का कब्जा है, लेकिन सांसद रमेश बिधूड़ी की जगह दिल्ली के नेता विपक्ष रामवीर सिंह बिधूड़ी को उम्मीदवार बनाया गया है। वहीं, आप के खाते में आई इस सीट पर गठबंधन से सहीराम चुनावी मैदान में हैं। दोनों प्रत्याशी पहली बार लोकसभा चुनाव में किस्मत आजमा रहे हैं।
लोकसभा क्षेत्र का इतिहास
दक्षिणी दिल्ली लोकसभा सीट साल 1967 के चौथे आम चुनाव से अस्तित्व में आई। परिसीमन के बाद 2009 में कालकाजी विधानसभा क्षेत्र को छोड़कर बाहरी दिल्ली के नौ विधानसभा क्षेत्रों को जोड़ा गया। बीते 15 लोकसभा चुनावों में इस सीट पर 10 बार जनता पार्टी व भाजपा ने जीत दर्ज की, जबकि पांच बार यह सीट कांग्रेस के पास रही। वर्ष 1977 में विजय कुमार मल्होत्रा ने जनता पार्टी के टिकट पर चुनाव जीता था। साल 2014 से यह सीट लगातार भाजपा के पास है। इस सीट पर रमेश बिधूड़ी ने लगातार दो बार जीत हासिल की थी।
इस बार के प्रत्याशी
रामवीर सिंह
बदरपुर विधानसभा से विधायक रामवीर सिंह बिधूड़ी मौजूदा समय में दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष हैं। चार बार के विधायक रामवीर तुगलकाबाद गांव के किसान परिवार से आते हैं। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के देशबंधु कॉलेज से 1973 में राजनीति विज्ञान में स्नातक किया था। वह 1970 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद में शामिल हुए और जनसंघ के सक्रिय कार्यकर्ता भी रहे। साल 1993 में वह पहली बार विधायक बने। 14 अप्रैल 2008 को तत्कालीन लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी ने उन्हें सर्वश्रेष्ठ विधायक के पुरस्कार से सम्मानित किया था। 2013 में रामवीर भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य बने।
सहीराम
सहीराम मौजूदा समय में तुगलकाबाद से विधायक हैं। गुर्जर समुदाय से आने वाले सहीराम साल 2014 से आम आदमी पार्टी के साथ हैं। वह अपने समय में कुश्ती के खिलाड़ी रहे हैं। उन्होंने सीआईएसएफ में सेवाएं दी हैं। साल 1997 में उन्होंने नौकरी छोड़कर पार्षद का चुनाव लड़ा और जीते। साल 1999 से 2002 निगम में मध्य दिल्ली से अध्यक्ष रहे। साल 2007 और 2013 में लगातार निगम पार्षद चुने गए। साल 2013 में उप महापौर बने। साल 2015 में पहली बार विधानसभा का चुनाव लड़े और विधायक बने। वे लगातार विधायक हैं।