बिल्डरों की लापरवाही से खरीदारों के लिए घर के कब्जे का इंतजार बढ़ता जा रहा है। प्रोजेक्ट की लेटलतीफी का आलम यह है कि टियर-1 शहरों में ग्रेटर नोएडा में सबसे ज्यादा 74 हजार से अधिक फ्लैट्स अधूरे पड़े हैं। आठ वर्षों में प्रत्येक पांच में एक निर्माणाधीन घर का निर्माण कार्य रुका है। वहीं शेष चार घरों की डिलीवरी में तीन से पांच वर्ष की देरी हुई है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में शामिल गुरुग्राम भी इस लेटलतीफी के आंकड़े में देश में तीसरे नंबर पर है। वहां 52 हजार से ज्यादा फ्लैट अधूरे हैं।
शुक्रवार को जारी एनालिटिक्स फर्म प्रॉपइक्विटी की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2016 से 2024 के बीच बिल्डर परियोजनाओं और और यूनिट का निर्माण कार्य बीच में रुकने का सिलसिला तेजी से बढ़ा है। टियर-1 शहरों में ग्रेटर नोएडा में सबसे ज्यादा 17 फीसदी यूनिट का काम रुका है। यहां 167 परियोजनाओं में 74,645 फ्लैट अधूरे हैं। वहीं महाराष्ट्र के ठाणे में 13 फीसदी यानी 186 परियोजनाओं में 57,520 फ्लैट और गुरुग्राम में 158 परियोजनाओं में 52,509 फ्लैटों का काम रुका है।
अहम है कि वर्ष 2019 और 2020 में कोरोना संक्रमण के दौर में अकेले ग्रेटर नोएडा में 100 से ज्यादा बिल्डर परियोजनाएं अटक गईं। इसमें 50 हजार से ज्यादा खरीदारों के घर का सपना ही अधर में है। हालांकि बिल्डरों को राहत देते हुए शासन ने अमिताभ कांत समिति की सिफारिश लागू कर बकाए का 25 फीसदी रकम जमा कर रजिस्ट्री की अनुमति दी है। ऐसे में आने वाले छह महीने में 40 हजार से ज्यादा रजिस्ट्री के साथ इन फ्लैट्स का काम पूरा कर लिया जाएगा।
प्राधिकरण के अधिकारियों के अनुसार ग्रेनो में वर्तमान में 150 से ज्यादा बिल्डर परियोजनाओं का पूर्णता प्रमाण पत्र का इंतजार है। इन परियोजनाओं में 65 हजार से ज्यादा फ्लैट्स भी अधूरे हैं। इसी तरह यमुना प्राधिकरण में सबलेसी सहित 14 बिल्डर परियोजनाओं में सात हजार से ज्यादा फ्लैट खरीदारों को अपने घर का इंतजार है।
44 शहरों में 1981 प्रोजेक्ट्स की डिलीवरी नहीं : प्रॉपइक्विटी के सीईओ समीर जसूजा ने बताया कि भारत के 44 शहरों में रेरा अनुमोदित परियोजनाओं से रियल एस्टेट आंकड़े जुटाए हैं। इनमें 14 टियर 1 और 30 टियर 2 शहर शामिल हैं। रुकी हुई युनिट्स की संख्या 2018 में 4,65,555 यूनिट्स थी, जो नौ फीसदी बढ़कर 5,08,202 पर पहुंच गई है। आंकड़ों के अनुसार 14 टियर 1 शहरों में 1636 प्रोजेक्ट्स में कुल 4,31,946 युनिट्स तथा टियर 2 शहरों में 345 प्रोजेक्ट्स में 76,256 युनिट्स का काम रुका हुआ है।
बेहतर कनेक्टिविटी से आ रहा निवेश : विश्लेषकों के मुताबिक, दिल्ली-एनसीआर देश में सबसे अच्छे बुनियादी ढांचे और कनेक्टिविटी में से एक है। नोएडा और गुरुग्राम में कई बहुराष्ट्रीय कंपनियों की उपस्थिति के साथ यह रियल एस्टेट निवेश के लिए एक बेहतर क्षेत्र माना जाता है।