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सख्ती: दिल्ली की सहकारी समितियों में मनोनयन पर रोक, अब हर पद के लिए होगा चुनाव; 90 दिन में बदलने होंगे बायलॉज

Sun, 21 Jun 2026 06:01 AM IST
दुष्यंत शर्मा आदित्य पाण्डेय, नई दिल्ली

सार

सहकारी समितियों की मैनेजमेंट कमेटियों में सीधे मनोनयन (को-ऑप्शन) के जरिए पद भरने की व्यवस्था पर रोक लगा दी गई है। अब कमेटी के सभी पदों पर नियुक्ति केवल चुनाव के माध्यम से ही होगी।
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Delhi Secretariat/demo - फोटो : X @TheRealDharm
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विस्तार
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दिल्ली की हजारों सहकारी समितियों में वर्षों से चल रही मनमानी पर अब सरकार ने सख्ती शुरू कर दी है। सहकारी समितियों की मैनेजमेंट कमेटियों में सीधे मनोनयन (को-ऑप्शन) के जरिए पद भरने की व्यवस्था पर रोक लगा दी गई है। अब कमेटी के सभी पदों पर नियुक्ति केवल चुनाव के माध्यम से ही होगी।

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सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार (आरसीएस) ने इस संबंध में निर्देश जारी कर दिए हैं। विभाग के अनुसार दिल्ली सहकारी समिति अधिनियम-2003 में मैनेजिंग कमेटी में सदस्यों के मनोनयन का कोई प्रावधान नहीं है। इसके बावजूद कई समितियां पुराने नियमों का हवाला देकर अपने करीबी लोगों को पदों पर नियुक्त कर रही थीं। अब ऐसी नियुक्तियां अवैध मानी जाएंगी। नए निर्देशों के तहत सभी सहकारी समितियों को 90 दिनों के भीतर अपने बायलॉज में संशोधन करना होगा। निर्धारित अवधि में बदलाव नहीं करने वाली समितियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।

चुनाव से पहले देनी होगी पूरी जानकारी
चुनाव प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए भी नई व्यवस्था लागू की गई है। किसी भी समिति की मौजूदा प्रबंधन समिति को कार्यकाल समाप्त होने से दो महीने पहले रजिस्ट्रार कार्यालय में घोषणा पत्र जमा करना होगा। इसमें पिछले पांच वर्षों की ऑडिट रिपोर्ट, वार्षिक आम सभा (एजीएम) का ब्योरा, सदस्यों की सूची और डिफॉल्टर सदस्यों की जानकारी देना अनिवार्य होगा। यदि कोई समिति समय पर चुनाव नहीं कराती या नियमों का पालन नहीं करती है तो वहां प्रशासक नियुक्त किया जा सकेगा। प्रशासक निर्धारित समय सीमा के भीतर चुनाव प्रक्रिया पूरी कराएगा।
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सदस्यों के रिकॉर्ड का होगा डिजिटलीकरण
फर्जी सदस्यता और सदस्यता संबंधी विवादों को रोकने के लिए सभी समितियों को अपने सदस्य रजिस्टर भी अपडेट करने होंगे। 30 दिनों के भीतर सदस्यों का नाम, पता, शेयर विवरण, नामांकित व्यक्ति और बैंक खाते से जुड़ी जानकारी जमा करनी होगी। जानकारी उपलब्ध नहीं कराने वाली समितियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इन सभी रिकॉर्ड को डिजिटल रूप से रजिस्ट्रार कार्यालय में दर्ज किया जाएगा।

मुकदमों में कमी लाने का लक्ष्य
सरकार का मानना है कि नई व्यवस्था से सहकारी समितियों में पारदर्शिता बढ़ेगी और लंबे समय से चले आ रहे विवादों तथा मुकदमों में कमी आएगी। चुनाव के लिए रिटर्निंग ऑफिसर की नियुक्ति और मतदाता सूची जारी करने की समयसीमा भी तय की गई है। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि केंद्रीय सहकारिता मंत्रालय की तर्ज पर दिल्ली का सहकारिता विभाग भी व्यापक सुधारों की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

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