फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पंचायत ने दबंगों से वापस दिलवाए जबरन खोलकर ले जाई गई भैंस के पैसे

Sat, 04 Feb 2017 12:23 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, गुरुग्राम
विज्ञापन
- फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
पिछले तीन माह से गांव के दबंग लोगों से परेशान गरीब एवं पीड़ित एक व्यक्ति को आखिरकार तीन माह बाद इंसाफ मिल ही गया। पुलिस अधिकारियों द्वारा  इस गरीब एवं पीड़ित व्यक्ति को  इंसाफ दिलाने पर पुलिस अधिकारियों की लोग मुक्त कंठ से प्रशंशा कर रहे हैं। 
विज्ञापन


बसईमेव गांव के अख्तर पुत्र चांदमल ने बताया कि उसके घर पर उसकी दुधारु भैंस जिसकी कीमत लगभग 70 हजार रुपये है बंधी हुई थी। गांव की कुछ दबंग लोगों ने उसकी भैंस को खूंटे से जबरदस्ती खोल लिया और ले गए। अख्तर ने कहा कि वह गरीब है गांव में उसका लाठी का जोर भी नहीं है। इसीलिए उसके पास इन दबंग लोगों की पुलिस में शिकायत करने के अलावा कोई चारा नहीं था। 

अख्तर ने बताया कि इस घटना के बाद से वह लगातार पुलिस थाने के चक्कर काट रहा था। पुलिस अधिकारियों से इंसाफ दिलाने की गुहार लगाता रहा लेकिन किसी ने एक न सुनी। उन्होंने बताया नए थाना प्रबंधक रतनलाल से उसने शिकायत कर पुन: उनको अपनी पीड़ा सुनाई। उन्होंने तुरंत कार्रवाही की।
विज्ञापन


बसईमेव गांव के अख्तर की भैंस को जबरदस्ती ले जाने वालों को गिरफ्तार करने के लिए थाना प्रबंधक रतनलाल ने गांव में दबिश देकर पकड़ भी लिया। लेकिन गांव के सरपंच सहित काफी मौजिज लोगों ने सब इंसपैक्टर रतनलाल से अनुरोध किया कि वे गांव में पंचायत कर इस मामले का निपटारा कर लेंगें।

गांव के मौजिज लोगों की कई घंटे तक पंचायत चली। इस भरी पंचायत में न केवल दबंग लोगों ने पीड़ित एवं गरीब अख्तर से माफी मांगी बल्कि उसकी भैंस के पैसे भी उसे दिए। पंचायत में हुए इस फैंसले से अख्तर की आखें नम हो गई।

उसने पुलिस थाना आकर थाना प्रबंधक रतनलाल का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी वजह से उसको इंसाफ मिल गया है। यह कहते-कहते अख्तर की आखों में खुशी के आसूं आ गए।

अन्यथा तो कोई भी पुलिस अधिकारी उसकी फरियाद को सुनकर राजी नहीं था। अख्तर ने कहा काश ऐसे पुलिस अधिकारी सभी जगह हो जाएं तो लोगों को परेशानी का सामना ही न करना पड़े। वहां पर खड़े और भी पुलिसकर्मी भी अख्तर को देखकर काफी खुश हुए। 

किसी भी व्यक्ति के साथ अन्याय किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अख्तर की परेशानी जायज थी इसीलिए उसकी सहायता कर अपना फर्ज और धर्म निभाया है। समय पर लोगों को इंसाफ देना ही मेरी प्राथमिकता है। - रतनलाल, थाना प्रबंधक, फिरोजपुर झिरका।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें