45 साल बाद लोनी में बाढ़
रात होते-होते लोनी कस्बे के बाहरी इलाके में भी पानी घुस गया। सबसे बड़ी चिंता यह है कि हालात सुधरने के बजाय बिगड़ते जा रहे हैं। दूसरे दिन भी पुश्ते की दरार भरी नहीं जा सकी। पानी के तेज बहाव से यह 100 फुट चौड़ी हो गई। लोनी क्षेत्र में 1978 में आई बाढ़ के 45 साल बात इतने बुरे हालात बने हैं।
लोनी के इन इलाकों में घुसा पानी
बृहस्पतिवार को पुश्ता टूटने के 24 घंटे के अंदर ही खादर के मीरपुर हिंदू, सुंगरपुर, बदरपुर, अलीपुर, पचायरा, नवादा, सुभानपुर गांव में यमुना का पानी भर गया है। यहां जन जीवन ठप हो गया है। लोग घरों से निकल नहीं पा रहे। तहसील की टीम पुश्ते को रेत और ईंट से भरे कट्टे डालकर पुश्ते को बंद करने में लगी लेकिन नतीजा सिफर ही रहा। शुक्रवार को ट्रानिका सिटी में पानी भर गया।
राहत बचाव टीम पहुंची मौके पर
जगह-जगह लोग पानी में फंस गए। ऐसे में एनडीआरएफ की टीम को बुलाना पड़ा। टीम ने 100 लोगों को नाव से बाहर निकाला । इन लोगों को पुश्ते के पास ही नगर पालिका के टेंट में ठहराया जा रहा है। ट्रानिका सिटी पुलिस चौकी भी पानी में डूब गई है। गाजियाबाद के लोनी इलाके के अलावा दिल्ली और यमुना नदी से सटे नोएडा और ग्रेटर नोएडा के इलाके भी डूब गए हैं।