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दिल्ली दंगों के वक्त छूटा काम, लॉकडाउन ने तोड़ दी कमर, घर वापसी हुई तय

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मोरटा में घर जाने के लिए बसों के इंतजार में लाइन में लगे प्रवासी मजदूर - फोटो : AMAR UJALA
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सबहेड- मोरटा से रोडवेज के जरिए पूर्वांचल जा रहे प्रवासी मजदूरों का छलका दर्द, 1200 से अधिक प्रवासी मजदूरों को पूर्वांचल के विभिन्न जिलों में भेजा गया - दिल्ली के भजनपुरा सहित अन्य क्षेत्रों से पहुंचे प्रवासी मजदूर बोले, दिल्ली दंगों से ही काम मिलने में आ रही थी परेशानी - लॉकडाउन में खाने को सामान और पैसे भी नहीं बचे, गांव जाकर कर लेंगे गुजारा प्रद्युम्न उपाध्याय गाजियाबाद। लॉकडाउन के चौथे चरण में प्रवासी मजदूरों का मुश्किलों भरा घर वापसी का सफर लगातार जारी है। दिल्ली के दंगों का दर्द झेल चुके दिल्ली के भजनपुरा सहित विभिन्न क्षेत्रों से सैकड़ों की संख्या में प्रवासी मजदूर घर जाने के लिए गाजियाबाद के मोरटा पहुंचे। दिल्ली से आए प्रवासी मजदूर बोले की दिल्ली दंगों के वक्त ही उनका काम छूट गया था। लॉकडाउन ने तो उन जैसे तमाम श्रमिक परिवारों की कमर ही तोड़ के रख दी। खाने के लिए दाने-दाने और पैसे को मोहताज प्रवासी मजदूर 2 दिन पैदल चलकर घर वापसी के लिए गाजियाबाद पहुंचे। जिला प्रशासन बीते 2 सप्ताह से प्रवासी मजदूरों को घर भेजने के लिए मोरटा के राधा स्वामी सत्संग स्थल से रोडवेज की बसें संचालित कर रहा है। ऐसे में दिल्ली सहित एनसीआर के विभिन्न क्षेत्रों से प्रवासी श्रमिकों के आने का सिलसिला लगातार जारी है। शुक्रवार को दिल्ली के भजनपुरा व अन्य क्षेत्रों से बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर मोरटा पहुंचे। दिल्ली के भजनपुरा से आई प्रवासी मजदूर सोमवती ने अपनी दर्द भरी कहानी बयां की। उन्होंने कहा कि भजनपुरा की एक फैक्ट्री में उनका परिवार काम करता था। दिल्ली के दंगों में उनके साथ सैकड़ों मजदूरों के परिवार का काम छूट गया। उन्होंने कहा कि दंगों के बाद जैसे-तैसे काम कर बच्चों का पेट भर रहे थे, लेकिन कोरोना के चलते लगे लॉकडाउन ने सब कुछ तबाह कर दिया। लॉकडाउन में न उनके पास खाने के लिए राशन था, और ना ही पैसे। जैसे तैसे लोगों से मांग कर लॉकडाउन में गुजारा किया। अब शाहजहांपुर में अपने गांव जाकर ही परिवार का गुजारा कर लेंगे। लॉकडाउन में पूरे परिवार ने बहुत परेशानी झेली है, ऐसे में दोबारा लौटने से पहले सौ बार सोचेंगे। ------------------------ 1200 प्रवासी मजदूरों को पूर्वांचल के विभिन्न जिलों मैं लेकर गई बसें मोरटा स्थित राधा स्वामी सत्संग स्थल से शुक्रवार को 1200 से अधिक प्रवासी मजदूरों को रोडवेज बसों के जरिए उनके घरों को भेजा गया। बसों में बिठाने से पहले सभी प्रवासी मजदूरों की स्कैनिंग के साथ ब्यौरा एकत्रित किया गया। गाजियाबाद पहुंचे अधिकांश मजदूर गोरखपुर, बस्ती, बहराइच, प्रयागराज, लखनऊ, शाहजहांपुर, प्रतापगढ़, फैजाबाद सहित पूर्वांचल के विभिन्न जिलों के थे। बसों में बैठाने से पहले प्रवासी मजदूरों को खाने के पैकेट और पानी का वितरण किया गया। डीएम अजय शंकर पांडे और एसएसपी ने मोरटा पहुंचकर व्यवस्थाओं का जायजा भी लिया। ------------------------ बिहार बॉर्डर के साथ उत्तराखंड के लिए रवाना हुई कई बसें मोरटा से प्रवासी मजदूरों के लिए पूर्वांचल के अलावा बिहार के बॉर्डर और उत्तराखंड के लिए भी कई बसों के लिए को रवाना किया गया। उत्तराखंड रोडवेज की ओर से छह बसों के जरिए प्रवासी मजदूरों को सिलसिलेवार विभिन्न जनपदों के लिए भेजा गया। इसके अलावा बिहार की ओर जाने वाले सैकड़ों की संख्या में प्रवासी मजदूरों को श्रमिक ट्रेन के अलावा बसों के जरिए यूपी-बिहार बॉर्डर के जिलों के लिए भेजा गया। प्रवासी श्रमिकों को भेजने के लिए पूरा प्रशासनिक अमला मोरटा में मुस्तैद दिखाई दिया। -------------------- प्रवासी मजदूरों की परेशानी उनकी जुबानी 1. पहले भजनपुरा में हुए दंगों के चलते उनका काम छूट गया। फिर लगे लॉकडाउन के कारण घर जाने के सिवाय दूसरा रास्ता नहीं बचा है। लॉकडाउन में पूरे परिवार ने बहुत परेशानी झेली है, लौटने से पहले सौ बार सोचेंगे। - सोमवती, शाहजहांपुर निवासी 2. लॉकडाउन के चलते दिल्ली की एक फैक्ट्री में काम छूट गया। ऐसे में 2 महीने से दिल्ली में जीवन के लिए संघर्ष कर रहे थे। घर पर छोटा बेटा और पत्नी बहुत परेशान थे। अब जाकर राहत मिली है। - भारत सिंह, कानपुर देहात निवासी 3. परेशानी तो दिल्ली दंगों के बाद काम छूटने से शुरू हो गई थी। लॉकडाउन ने तो आग में घी का काम किया। बीते 1 माह से राशन के साथ पैसे भी खत्म हो चुके थे। ऐसे में घर वापसी के अलावा उनके पास दूसरा कोई विकल्प नहीं बचा है। - ऋषिपाल सिंह, शाहजहांपुर निवासी -----------
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