गाजियाबाद। अपराधियों की जल्द से जल्द और कड़ी से कड़ी सजा दिलाने के लिए ठोस पैरवी करने के पुलिस के तमाम दावों के बावजूद 72 फीसदी मुकदमो में आरोपी बरी हो गए। इनमें 90 फीसदी से ज्यादा में सजा न हो पाने की वजह कोर्ट में गवाहों का मुकर जाना रही। दुष्कर्म और हत्या जैसे केस में भी गवाहों ने कोर्ट के सामने कहा, पुलिस के डर से जो बयान दिया था, वह सही नहीं है। नतीजा यह है कि नवंबर 2022 से नवंबर 2023 तक 12 महीनों में सिर्फ 78 फीसदी मुकदमों में ही कोर्ट ने सजा सुनाई है।
इस एक साल में जिला न्यायालय में कुल 561 मामलों की सुनवाई पूरी हुई है। इनमें 155 में सजा सुनाई गई है, जबकि 406 में आरोपी बरी हो गए हैं। 406 में से सिर्फ 25 केस ऐसे हैं, जिनमें जिला न्यायालय के फैसले के खिलाफ उच्च न्यायालय में अपील की गई है। इनमें हत्या, दुष्कर्म, ठगी, मारपीट और धोखाधड़ी के केस शामिल हैं।
यह हाल तब है जबकि संगीन मामलों में सजा दिलाने के लिए पुलिस की ओर से अभियान चलाया जा रहा है। इसमें थाने के पैरोकारों से लेकर विवेचना अधिकारियों को खास तौर से प्रशिक्षण दिया गया है लेकिन नतीजा ढाक के तीन पात है।
संदेह का मिलता है लाभ
जिला शासकीय अधिवक्ता राजेश चंद्र शर्मा का कहना है कि कई मामलों में पुलिस पर्याप्त साक्ष्य अदालत में उपलब्ध नहीं करा पाती है। कई मामलों में गवाह पक्षद्रोही हो जाते हैं। इस कारण से आरोपी को संदेह का लाभ मिलता है और अपराध करने के बावजूद वह बरी हो जाता है।
केस लंबा खिंचने से परेशानी
अधिवक्ता राजकुमार चौहान का कहना है कि जिन मामलों की सुनवाई बहुत लंबी चलती है, उनमें गवाहों का अपने बयान पर टिके रहना मुश्किल होता है। उन पर तरह-तरह के दबाव बन जाते हैं। अगर घटना के कुछ ही दिन में कोर्ट में गवाही हो जाए तो गवाह अपने बयान पर कायम रहते हैं।
27 साल चली सुनवाई, आरोपी बरी
अधिवक्ता राजकुमार चौहान ने बताया कि पिलखुवा के युवक संजय की हत्या के मुकदमे की सुनवाई 27 साल चली। इसमें पुष्पा, उनके बेटे मनीष सहित चार आरोपी थे। सुनवाई के दौरान 28 जज के तबादले हुए। केस में सभी आरोपी साक्ष्य के अभाव में बरी हो गए।
दुष्कर्म के केस में बदल दिया बयान
लोनी क्षेत्र में एक महिला ने पड़ोसी युवक पर नाबालिग बेटी को भगा ले जाने और दुष्कर्म का आरोप लगा थाने में रिपोर्ट दर्ज करा दी। इस मामले में युवक उसके पिता, भाई और जीजा को पुलिस ने जेल भेज दिया था। जमानत पर युवक के जेल से बाहर आने के बाद बेटी ने कहा कि वह युवक के साथ ही रहेगी। इसके बाद लड़की की मां अदालत में बयान से पलट गई और कहा कि पुलिस ने रिपोर्ट में क्या लिखा था, उसे नहीं पता, उन्होंने तो सिर्फ गुमशुदगी दर्ज कराई थी।
एक साल में निस्तारित मुकदमे
महीना मुकदमे बरी सजा
नवंबर 2022 39 30 09
दिसंबर 38 28 10
जनवरी 2023 28 20 08
फरवरी 36 17 16
मार्च 43 28 15
अप्रैल 37 23 14
मई 24 10 14
जून 23 11 13
जुलाई 39 25 14
अगस्त 37 20 17
सितंबर 07 07 00
अक्बूबर 30 17 13
नवंबर 25 13 12