गाजियाबाद लोकसभा सीट पर मतदान का ग्राफ एक बार भी तेजी से आगे नहीं बढ़ा। सुबह से शाम हो गई लेकिन ग्राफ की चाल कछुए की तरह धीरे-धीरे ही रही। सुबह को जरूर कुछ रौनक दिखी लेकिन दोपहर की धूप में तो मतदान केंद्रों पर सन्नाटे जैसा नजारा रहा। बूथ तक वाहन ले जाने की सहूलियत मिल जाने के बाद भी मतदाताओं में उत्साह कम ही दिखा। इसी का नतीजा रहा कि दस साल बाद एक बार फिर मतदान का आंकड़ा 60 के अंक को नहीं छू सका।