गाजियाबाद। खाते में रुपये भेजने की फर्जी ट्रांजेक्शन दिखाकर सराफ से गहनों की ठगी करने वाले गिरोह का नगर कोतवाली पुलिस और डीसीपी नगर की स्वाट टीम ने खुलासा किया है। पुलिस ने गिरोह के सरगना समेत दो शातिरों को गिरफ्तार किया है। इनके पास से ठगी किए गए गहनों में से 30 ग्राम के सोने के सिक्के, छह किलो चांदी के 60 सिक्के और तीन मोबाइल फोन बरामद किए हैं।
डीसीपी नगर निपुण अग्रवाल ने बताया कि पकड़े गए शातिर मुरादाबाद के नगर कोतवाली क्षेत्र निवासी सीमाव उर्फ मनु और थाना पाकबड़ा निवासी मुख्तयार हैं। इन्होंने 25 अगस्त को सराफ सचिन कुमार से 10.48 लाख की कीमत के गहने ठगे थे। गिरोह का सरगना सीमाव है जो बीबीए पास है और मुख्तायर चौथी फेल है। गिरोह के दो शातिर आलम और सचिन शर्मा को पुलिस पूर्व में गिरफ्तार कर चुकी है। जिन्हें सीमाव ने दो-दो हजार रुपये देने का लालच देकर सराफ सचिन कुमार से गहने उठाने के लिए भेजा था। डीसीपी ने बताया कि सीमाव के खिलाफ मुरादाबाद में पांच और अलीगढ़ में एक धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज है। मामले में दो लोग फरार है जिनकी तलाश की जा रही है।
ऐसे करते हैं ठगी
एसीपी कोतवाली निमिष पाटिल ने बताया कि सीमाव ने फर्जी कंपनी बना रखी है। सीमाव फर्जी सिम नंबरों के जरिये अलग-अलग शहरों के सराफ से संपर्क करते हैं और गहने खरीदने का सौदा करते हैं। ऑर्डर देने के बाद व्हाट्सएप पर ही सराफ के पास बैंक खाते में आरटीजीएस व एनईएफटी करने की फर्जी ट्रांजेक्शन का स्क्रीनशॉट भेजते हैं। आरटीजीएस व एनईएफटी करने पर खाते में रकम आने में दो से तीन घंटे लगते हैं। ऐसे में सराफ ट्रांजेक्शन का स्क्रीनशॉट देखकर विश्वास करके उसके आदमियों को गहने दे देते हैं। बाद में उन्हें जब रकम खाते में नहीं आती तो उन्हें ठगी का पता चलता है।
ट्रांजेक्शन का बना रखा था नमूना
पुलिस को शातिरों के पास से मिले मोबाइल फोनों में से ट्रांजेक्शन के कई नमूने मिले हैं। जिनमें यूटीआर नंबर, दिनांक, रकम, खाता संख्या, मोड समेत अन्य बिंदु हैं। जिन पर सीमाव एडिट करके उनमें फर्जी जानकारी भरकर सराफ को उसका स्क्रीनशॉट भेज देता है।