गाजियाबाद। 21 जुलाई को दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर हुए हादसे में मां-बेटे (मंजू और यश) की मौत के मामले में पुलिस ने टोलकर्मी और प्रबंधक को भी आरोपी बनाया है। पुलिस का कहना है कि एक्सप्रेसवे पर दोपहिया वाहनों का प्रतिबंध है। इसके बावजूद स्कूटी सवार मां-बेटे को टोल पर प्रवेश के दौरान टोलकर्मी ने उन्हें मेरठ के परतापुर में नहीं रोका। यदि टोलकर्मी स्कूटी सवार मां-बेटे को टोल पर रोक देते तो उनकी जान बच सकती थी।
एसीपी वेव सिटी पूनम मिश्रा ने बताया कि दिल्ली निवासी यश अपनी मां मंजू के साथ हरिद्वार से लौट रहे थे। वे मेरठ से दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर आए और वेव सिटी क्षेत्र में पहुंचे तो उनकी हादसे में मौत हो गई थी। जांच के दौरान सीसीटीवी फुटेज देखे गए तो सामने आया कि वह दोनों मेरठ के परतापुर टोल प्लाजा से एक्सप्रेसवे पर चढ़े थे। टोलकर्मी अगर चाहते तो उन्हें रोक सकते थे। मामले में दर्ज मुकदमे में विवेचक ने टोलकर्मी प्रवीन और प्रबंधक प्रमोद धनकड़ का नाम इसमें शामिल किया है। उन्होंने बताया कि आगे भी अगर इस प्रकार की लापरवाही होती है तो टोलकर्मियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी। मामले में आगे की कार्रवाई की जा रही है।