गाजियाबाद। साइबर अपराधी भी अपग्रेड हो गए हैं। शातिर लोगों से रकम ठगने के बाद उन्हें बिटकाइन में बदल दे रहे हैं। इसके बाद शातिर बिटकाइन एनएफटी (नॉन फंजीबल टोकन) के जरिये बिटकाइन को भारतीय मुद्रा में बदलकर अनजान लोगों के खाते में भेज दे रहे हैं। बाद में उन लोगों को कॉल कर गलती से रुपये भेजने की बात कहकर वापस मांग रहे हैं। ऐसे में पुलिस मामले में जांच के दौरान ट्रांजेक्शन होने पर खाते फ्रीज कर दे रही है। 100 से ज्यादा ऐसी शिकायत साइबर सेल में आ चुकी है।
एडीसीपी अपराध सच्चिदानंद ने बताया कि ठगी के मामलों में शिकायत मिलने पर जांच के दौरान ठगी की रकम जिन खातों में जाती है, उन्हें ट्रेस करते हुए उन खातों को पुलिस फ्रीज करा देती है। गाजियाबाद साइबर सेल में बैंक खाते फ्रीज होने की जो शिकायतें हैं वे अन्य जिलों की पुलिस द्वारा फ्रीज करने की हैं। इन मामलों में केस दर्ज कर जांच अधिकारी की रिपोर्ट के आधार पर अनफ्रीज कराए जाते हैं। (संवाद)
एनएफटी से बिटकाइन को भारतीय मुद्रा में बदल रहे शातिर
साइबर एक्सपर्ट करण भारद्वाज ने बताया कि साइबर अपराधी अब पकड़े जाने से डर से एक नया तरीका अपना लिया है। शातिर ठगी की रकम को खातों में न डलवाकर बिटकाइन खरीद रहे हैं। बिटकाइन को भारतीय मुद्रा में बदलने के लिए एनएफटी (नॉन फंजीबल टोकल) के जरिये बदलकर रकम को आम लोगों के खाते में डाल रहे हैं। इसके बाद उन्हें कॉल करके गलती से डलने की बात कहकर वापस मांग लेते हैं। ऐसे में शिकायत मिलने पर पुलिस जिस खाते में रकम जाती है उसे फ्रीज करा देती है।
केस एक
नगर कोतवाली क्षेत्र निवासी सुरेंद्र मजदूरी करते हैं। उनका कहना है कि उनके खाते में एक अनजान नंबर से 250 रुपये आ गए। इसके बाद उनके पास एक कॉल आई, कॉलर ने गलती से खाते में रुपये डालने की बात कही। इसके बाद उनका बैंक खाता फ्रीज हो गया। मामले में उन्होंने साइबर सेल में शिकायत की है।
केस दो
कविनगर क्षेत्र में निवासी नीता उपाध्याय के खाते में अनजान नंबरों से पिछले कुछ महीनों में 30 से 35 हजार रुपये आए। रुपये आने के बाद अलग-अलग नंबरों से कॉल कर कॉलर ने गलती से रुपये डालने की बात कहकर वापस मांग लिए जो उन्होंने भेज दिए। तीन महीने तक ऐसा होने से परेशान होकर साइबर सेल में शिकायत की।