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Ghaziabad News: एक्सप्रेसवे से तीन किमी. दूर जमीन का कागजों में दिखा दिया अधिग्रहण

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गाजियाबाद। दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे के लिए किए गए जमीन अधिग्रहण में बड़ा गोलमाल सामने आया है। डासना के रहने वाले यामीन की उस जमीन को भी अधिग्रहीत बता दिया गया जो एक्सप्रेसवे से तीन किलोमीटर की दूरी पर है। इस 624 वर्ग मीटर जमीन का मुआवजा भी दे दिया गया। मुआवजे की रकम लगभग 26.94 लाख रुपये है। यह रकम यामीन को नहीं, बल्कि उन लोगों को मिली जिन्होंने जमीन के फर्जी दस्तावेज लगाकर एनएचएआई से मुआवजा मांगा। यामीन ने अब जालसाजी में शामिल रहे दस लोगों के खिलाफ कविनगर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई है।
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यामीन ने एफआईआर में बताया है कि वेवसिटी के पास उनकी करीब पांच बीघा जमीन खसरा नंबर 913 पर दर्ज है। एक्सप्रेसवे से उनकी जमीन करीब तीन किलोमीटर दूर है। उसका रकबा पूरा है और वह उसमें खेती कर रहे हैं। वह फरवरी 2021 में अपनी जमीन की फर्द निकलवाने के लिए तहसील गए तो उसमें उनके खाते की 624 वर्ग मीटर जमीन एक्सप्रेसवे में अधिग्रहित होना लिखी थी।



जानकारी करने पर पता चला कि एनएचएआई से 2015 में ही 26.94 लाख का मुआवजा सुगरा, साबरा, उमर, जरीना, नवाबुददीन, सरफराज, इदरीश, अखलाक ने ले लिया। इसकी उन्होंने शिकायत की तो अधिकारियों ने सुगरा के नाम से नोटिस जारी कर दिया लेकिन इसके आगे कोई कार्रवाई नहीं की। अपनी फर्द से वह मुआवजे और अधिग्रहण का आदेश हटवाने के लिए तहसील गए तो वहां भी कोई सुनवाई नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने कोर्ट में गुहार लगाई। कोर्ट ने इसमें दस लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करने के आदेश दिए। शुक्रवार को इसमें कविनगर थाने में रिपोर्ट दर्ज हो गई।
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जांच में फंस सकते हैं अधिकारी

एनएचएआई से जमीन अधिग्रहण संबंधी रिपोर्ट अपर जिलाधिकारी भूमि अध्यापित के पास से होकर तहसील में आती है। वहां से लेखपाल की रिपोर्ट लगने के बाद दोबारा एनएचएआई को जाती है। यामीन ने बताया कि लेखपाल या अन्य किसी भी स्तर से मामले की जांच नहीं की गई। जो कागज फर्जी तरीके से दाखिल किए गए उनका भौतिक सत्यापन किए बिना उनपर रिपोर्ट लगाकर आगे भेज दी गई। इसका अनुचित लाभ अपात्रों को मिल गया। एफआईआर की जांच ठीक से हुई तो अफसरों का फंसना तय है।



मृतकों को जीवित दिखाकर की जालसाजी



शिकायतकर्ता ने बताया कि उनकी माता का नाम सुगरा था और पिता का नाम खुरशेद था। दोनों का इंतकाल हो चुका है। आरोपियों ने दोनों को जीवित दिखाकर उनके नाम से फर्जी कागजात तैयार कराकर दाखिल कर दिए। इसकी सत्यता की कोई जांच नहीं हुई। खास बात यह है कि जिन लोगों को मुआवजा मिला, उनके नाम पर एक बिस्वा भी कहीं पर जमीन नहीं है। इतना बड़ा घोटाला होने के बाद भी अधिकारिक स्तर पर मुआवजा वापसी और उनकी फर्द में दर्ज आदेश को हटवाने की कोई प्रक्रिया शुरू नही हो सकी है।







मामले की जांच की जा रही है। इस मामले में तहसील से भी रिपोर्ट मांगी जाएगी। एनएचएआई के अधिकारियों से भी बात की जाएगी। साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई सुनिश्चित होगी।
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-अभिषेक श्रीवास्तव एसीपी कविनगर
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