न्यायालय ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तेजी से सुनवाई की। मामले में सुनवाई के लिए जहां पुलिस को तेजी से सभी गवाह व साक्ष्य न्यायालय में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। वहीं, मामले की सुनवाई के लिए जल्दी-जल्दी तारीख लगाई। मामले में चार आरोपियों के होने के बाद भी न्यायालय ने मुकदमा दर्ज होने के करीब दो वर्ष में ही निर्णय सुना दिया। साथ ही न्यायालय ने मामले की गंभीरता को देखे हुए किसी भी आरोपियों को मुकदमे की पूरी सुनवाई के दौरान जमानत भी नहीं दी थी। जिसके चलते मामले के सभी आरोपी मुकदमे की पूरी सुनवाई के दौरान जेल में ही बंद रहे है।
न्यायालय ने चिकित्सक व महिला सिपाही पर कार्रवाई के लिए कहा
न्यायालय ने मामले में एक चिकित्सक व एक महिला सिपाही को अपने पद स्तर से उचित कार्य न करना पाया है। जिसको लेकर न्यायालय ने चिकित्सक पर आवश्यक कार्रवाई करने के लिए जिले के मुख्य चिकित्सा अधिकारी को निर्देशित किया है। साथ ही महिला सिपाही पर उचित कार्रवाई के लिए निर्णय की एक प्रति पुलिस अधीक्षक को भेजी है।
पीड़िता को एक लाख रुपये देने के आदेश
न्यायाधीश ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को पीड़िता को पुनर्वास के लिए एक लाख रुपये की प्रतिकार धनराशि देने के भी आदेश किए हैं। साथ ही कहा है कि प्राधिकरण के पास प्रतिकार की धनराशि देने के लिए फंड न होने पर जिलाधिकारी राज्य सरकार से उक्त धनराशि प्राप्त कर एक माह के अंदर पीड़िता को दे।