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Ghaziabad News: दाऊद से तार जुड़े बताकर डराया और ठग लिए 12 लाख

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गाजियाबाद। पुलिस अपराधी बनकर फोन पर लोगों को जेल भेजने का डर दिखाने वाले साइबर अपराधियों ने इंदिरापुरम की महिला को दो घंटे डिजिटल अरेस्ट रखा। इसके बाद जब वह बुरी तरह भयभीत हो गईं तब उनसे 12 लाख रुपये अपने खाते में जमा करा लिए। साइबर थाने में केस दर्ज कराते हुए उन्होंने बताया कि उन्हें डराने के लिए उनके तार दाऊद इब्राहिम गिरोह से जुड़े बताए गए और उन्हें गिरफ्तार करने की धमकी दी गई।
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उन्होंने पुलिस को बताया कि 14 मार्च को साइबर अपराधी ने काॅल करके कहा, तुम्हारे खाते से संदिग्ध लेन-देन हो रहा है। जांच में पता चला है कि तुम्हारे तार माफिया डाॅन दाऊद इब्राहिम के गिरोह के अपराधी मोहम्मद आसिफ से जुड़े हुए हैं। इसके बाद उसने काॅल किसी को ट्रांसफर कर दी।
काॅलर ने खुद को मुंबई क्राइम ब्रांच से बताया और कहा, तुम्हारे नाम से एक कुरियर ताइवान जा रहा है। इसे पकड़ लिया गया है। इसमें लैपटाॅप, सिम कार्ड और नशे के सामान मिथाइल एनीडियोक्सी मेथामफेटामाइन (एमडीएमए) है। महिला ने बताया कि इसी बीच उनकी काॅल को व्हाट्स एप पर ले लिया गया।
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उनसे कहा गया कि व्हाट्स एप चेक करें। उन्होंने देखा तो दो नोटिस थे। एक रिजर्व बैंक आफ इंडिया (आरबीआई) और दूसरा अपराधिक जांच विभाग (सीआईडी) से। वह बुरी तरह डर चुकी थीं। साइबर अपराधी ने कहा कि उनके खाते से धन शोधन (मनी लांड्रिंग) भी की गई है। खाते की जांच की जाएगी। इसके लिए वह कुल जमा राशि का 98 फीसदी बताए गए खाते में ट्रांसफर कर दें। उन्हें खाता संख्या बताई गई। डर के मारे उन्होंने 12 लाख रुपये जमा करा दिए। इसके बाद काॅलर का फोन स्विच आफ हो गया।
एडीसीपी अपराध सच्चिदानंद ने बताया कि जिन खातों में रकम ट्रांसफर कराई गई है, उनका पता करने का प्रयास किया जा रहा है। खाते का पता चलने पर रकम फ्रीज कराई जाएगी।



18 दिन में 25 मामले

पांच करोड़ की ठगी
गाजियाबाद। पिछले कुछ समय से डिजिटल अरेस्ट के मामले तेजी से बढ़े हैं। मार्च के महीने में ही 18 दिन में 25 मामले साइबर थाने में आ चुके हैं। इनमें ठगी गई रकम पांच करोड़ रुपये है। सबसे ज्यादा मामले ट्रांस हिंडन क्षेत्र से आए हैं। इनमें भी आधे से ज्यादा केस इंदिरापुरम के हैं। 40 फीसदी मामलों में महिलाओं को शिकार बनाया गया है। पीड़ित लोगों में डाॅक्टर और इंजीनियर भी हैं। साइबर थाना पुलिस अब तक गिरोह को पकड़ नहीं पाई है।
पुलिसवाला बन करके हैं काॅल
कानून की किताब में डिजिटल अरेस्ट नाम का कोई शब्द नहीं है। यह साइबर अपराधियों का ठगी करने का तरीका है। इसका सीधा सा मतलब है किसी को लक्ष्य बनाकर उसके मन में भय पैदा करना और एक ही जगह कैद रखना। इसके बाद उसे ब्लैकमेल कर रकम ऐंठ ली जाती है। इसमें साइबर अपराधी पुलिस अधिकारी बनकर काॅल करते हैं।


दिखाते हैं फर्जी थाना

साइबर अपराधी वीडियो काॅल के बैकग्राउंड को थाने की तरह बना लेते हैं। इसे देखकर यही लगता है कि काॅल करने वाला थाने से ही बोल रहा है। कई मामले में तो अपराधी पुलिस की वर्दी में था। ऐसा यकीन दिलाने के लिए किया जाता है कि काॅल पुलिसवाला ही कर रहा है। अपराधी पहले डराते हैं और फिर जेल जाने से बचाने के बदले रकम की मांग करते हैं।

तत्काल पुलिस को सूचना दें

अनजान नंबर से आने वाली काॅल नहीं उठानी चाहिए। पुलिस इस तरह काॅल करके किसी को डराती नहीं है।
खुद को पुलिसवाला बताकर कोई खाते में रकम जमा कराने के लिए कहे तो ऐसा बिल्कुल न करें। तत्काल इसकी सूचना नजदीकी थाने में दें।
अगर कोई फोन पर जेल भेजने की धमकी दे रहा है तो इसे रिकाॅर्ड कर लें, रिकाॅर्डिंग को पुलिस को सौंप दें।
(जैसा एडीसीपी क्राइम सच्चिदानंद ने बताया)

पुराने मामले

- इंदिरापुरम के रहने वाले एक व्यक्ति के साथ उनकी पत्नी को भी साइबर ठगों ने वीडियो कॉल पर गिरफ्तार करने की धमकी देकर 13 लाख रुपये ले लिए। ठगों ने उनके नाम से संदिग्ध सामान ताइवान भेजे जाने का डर दिखाकर ठगी की।
- साहिबाबाद के रहने वाले एक व्यक्ति को ठगों ने कॉल करके उनके खाते में संदिग्ध गतिविधि होने का डर दिखाकर खाते का सत्यापन करने के नाम पर खाते में जमा रकम का 80 फीसदी ट्रांसफर कराने के नाम पर 64 लाख रुपये ठग लिए।
- राजनगर में रहने वाले कारोबारी के बेटे के दुष्कर्म के मामले में गिरफ्तार होने की बात कहकर डेढ़ घंटे कॉल पर ही रखकर 12 लाख रुपये ठग लिए।
- सिद्धार्थ विहार की सोसायटी में रहने वाली इंजीनियर के नाम से रूस ड्रग्स भेजे जाने का डर दिखाकर डिजिटल अरेस्ट कर 6.13 लाख रुपये ठग लिए।
- वसुंधरा की रहने वाली महिला से कुरियर इराक भेजे जाने का डर दिखाया। जिसमें कुछ पासपोर्ट, क्रेडिट कार्ड, लैपटॉप और अन्य सामान के साथ एमडीएमए होने की बात कही। इसके बाद मामला संभालने के नाम पर 56 लाख रुपये ठग लिए।
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