गाजियाबाद। लोहा कारोबारी को नोएडा के दो लोगों ने उस प्लॉट का इकरारनामा कर दिया, जो मौके पर था ही नहीं। आरोपियों पर लोहा कारोबारी के छह लाख रुपये नकद और 12 लाख रुपये लोहे की आपूर्ति के उधार थे। इस एवज में उन्होंने प्लॉट का इकरार किया था। तय हुआ था जब वह रकम लौटा देंगे तो वह उनके प्लॉट का इकरारनामा वापस कर देंगे।
लोहा मंडी के कारोबारी प्रवीण कुमार गुप्ता ने बताया कि उनकी फर्म लोहे का काम करती है। उन्होंने सुजीत और तरुण कुमार निवासी तिलपता, सूरजपुर नोएडा को 12 लाख का लोहा उधार दिया था। वह पहले भी उनसे माल लेते रहे हैं तो उनका विश्वास भी हो गया था। 2020 में आरोपियों ने जरूरत बताते हुए उनसे छह लाख रुपये और मांगे, जिसका उन्होंने उनको चेक दे दिया। कुछ महीनों बाद रकम का तकादा करने पर आरोपियों ने कहा कि अभी उनका पैसे का इंतजाम नहीं हो पाया है, इसलिए वह अपने नाम पर खरीदे गए 250 वर्गगज के प्लॉट का उनको इकरारनामा कर देते हैं।
तय हुआ कि जब वह उनको रकम लौटा देंगे तो वह इकरारनामा वापस कर देंगे। आरोप है कि जब लंबे समय तक उन्होंने पैसा नहीं लौटाया तो उन्होंने बैनामा करने को कहा। आरोपियाें ने इस पर कोई जवाब नहीं दिया। इसके बाद उन्होंने इकरारनामे में लिखे प्लॉट और खसरा नंबर के आधार पर मौके पर जाकर देखा तो पता चला कि वहां कोई प्लॉट ही नहीं था। जब इस बारे में उनसे बात करनी चाही तो उन्होंने संपर्क तोड़ दिया। परेशान होकर उन्होंने दोनों के खिलाफ पुलिस अधिकारियों को शिकायत दी। इस बारे में एसीपी कविनगर अभिषेक श्रीवास्तव ने बताया कि मामले में रिपोर्ट दर्जकर जांच कराई जा रही है।
विवादित मकान का इकरारनामा कर 25 लाख ठगे
गोविंदपुरम में विवादित मकान का दंपती के नाम इकरारनामा कर उनसे 25 लाख रुपये ठगने की घटना सामने आई है। मामले में पीड़ित ने सरला, तनुश्री, अनुश्री, सतपाल यादव व राजेश कुमार के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है।
हापुड़ के पिलखुवा स्थित न्यू आर्य नगर निवासी योगेश अग्रवाल ने बताया कि जुलाई 2023 को उनकी मुलाकात गोविंदपुरम निवासी प्रॉपर्टी डीलर सतपाल यादव से हुई थी। सतपाल ने उनको गोविंदपुरम में एक मकान दिखाया। वहां सरला से उनकी मुलाकात हुई। सरला से मकान का सौदा एक करोड़ ढाई लाख रुपये में हो गया। सरला ने उनको इसका इकरारनामा कर दिया। इसके बदले उन्होंने 25 लाख रुपये सरला को दे दिए। सरला ने जीडीए में कुछ कागजी प्रक्रिया अटकने की बात कहकर कुछ दिन बाद बैनामा करने को कहा। जो तारीख तय हुई थी, उसके बाद भी कई बार बैनामे की तारीख आगे बढ़ाई गई। इसी दौरान उनको पता चला कि सरला का कोर्ट में किसी से मुकदमा चल रहा है और उन्होंने झूठ बोलकर उनको इकरारनामा कर दिया।