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Ghaziabad News: अस्पताल में बेड खाली नहीं, बढ़ रहे बुखार के मरीज

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गाजियाबाद। अस्पताल में बेड खाली नहीं हैं बुखार के मरीज बढ़ते जा रहे हैं। हालत यह हो गई है कि 166 बेड वाले एमएमजी अस्पताल में सोमवार को 205 मरीज भर्ती थे। एक बेड पर दो-दो मरीजों को भर्ती किया गया है। उमस और गर्मी से अस्पताल में इस समय सबसे अधिक वायरल बुखार और पेट दर्द के गैस्ट्रोइंटाइटिस के मरीज भर्ती हो रहे हैं। अस्पताल के बाह्य रोगी विभाग (ओपीडी) में 2009 मरीज आए। इनमें से 970 महिलाएं, 717 पुरुष और 322 बच्चे थे।
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एक सप्ताह से अस्पताल के इमरजेंसी, बच्चा वार्ड और जनरल वार्ड में एक बेड पर दो-दो मरीज भर्ती हो रहे हैं। कई बार बेड खाली करने के लिए मरीजों को दूसरे दिन ही डिस्चार्ज कर दिया जा रहा है। अस्पताल के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. संतराम वर्मा ने बताया कि कई मरीजों को पांच से सात दिन भी भर्ती करना पड़ता है, लेकिन कुछ मरीजों की तबीयत में दूसरे दिन सुधार होने पर डिस्चार्ज कर दिया जाता है। उन्होंने बताया कि बेड की कमी के कारण मरीजों को भर्ती करने के लिए दो से तीन घंटे तक इंतजार भी करना पड़ता है। ऐसे में उनका इलाज स्ट्रेचर पर ही होता है।
अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. मनोज कुमार चतुर्वेदी का कहना है कि अस्पताल में 166 बेड और 15 बेड इमरजेंसी वार्ड में हैं। एक सप्ताह से अस्पताल के वार्ड में सभी बेड पर मरीज भर्ती हैं। उन्होंने बताया कि बुखार के 298 मरीज इलाज कराने सोमवार को ओपीडी में पहुंचे थे। इनमें से 55 को भर्ती करने की जरूरत पड़ी थी। 322 बच्चों में अधिकांश बुखार, उल्टी-दस्त के मरीज थे। इनमें से 44 बच्चों को भर्ती किया गया, जबकि स्वस्थ हो चुके 34 को डिस्चार्ज किया गया। सीएमएस का कहना है कि मौसम में बदलाव से उमस और गर्मी बढ़ी है। इस कारण से वायरल और डिहाइड्रेशन के मामले ज्यादा आ रहे हैं। इसके अलावा सांस लेने में परेशानी, दिल संबंधी बीमारियों के अलावा मधुमेह के मरीजों की संख्या भी बढ़ी है।
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दूसरी बीमारी से संक्रमित हो सकता है मरीज
आईएमए के प्रदेश सचिव डॉ. वीबी जिंदल का कहना है कि मरीजों को भर्ती करने पर एक मानक तय किया गया है। उसका मकसद है कि एक मरीज से दूसरे मरीज का संक्रमण न पहुंच सके, लेकिन एक बेड पर दो- दो मरीज भर्ती होने से एक मरीज का संक्रमण दूसरे मरीज तक पहुंच सकता है। ऐसे में मरीज जिस बीमारी के लिए भर्ती हुआ है, उसका तो इलाज हो जाएगा, लेकिन कमजोर प्रतिरोधक क्षमता के कारण दूसरी बीमारी की चपेट में आ जाएगा। ऐसे में एक बेड पर दो मरीज भर्ती करने से बचना चाहिए।
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