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Ghaziabad News: बच्ची से कुकर्म के बाद की थी हत्या, अदालत ने सुनाई आजीवन कारावास की सजा

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कुकर्म के बाद हत्या का दोषी। 
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गाजियाबाद। मोदीनगर थाना क्षेत्र में तीन साल पहले सात वर्षीय बच्ची ने गौरव को घर से बाेतल में लाकर पानी दिया तो उसने फुसलाकर बाइक से ले जाकर कुकर्म कर हत्या कर दी। इस मामले में विशेष पॉक्सो कोर्ट तृतीय ने दोषी गौरव को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। न्यायाधीश तेंद्रपाल ने दोषी पर 43 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। अदालत ने 25 जनवरी को दोषी करार दिया था। सीसीटीवी फुटेज की मदद से आरोपी की शिनाख्त हुई थी।
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सोमवार को फैसला सुनते ही अदालत में मौजूद दादा-दादी रोने लगे। उन्होंने अदालत में हाथ जोड़कर कहा यह भगवान का दूसरा घर है। हमें न्याय मिल गया। हमारी बच्ची की आत्मा को शांति मिलेगी। दादी ने कहा उस दिन बच्ची राशन लेने के लिए साथ जाने की जिद कर रही थी, अगर बच्ची को साथ ले जाती तो आज वह जिंदा होती। भगवान ने न्याय किया है।


विशेष लोक अभियोजक हरीश कुमार ने बताया कि मोदीनगर थाने में 19 मई 2020 को एक व्यक्ति ने रिपोर्ट दर्ज कराते हुए कहा कि उनकी सात वर्षीय बच्ची को पिलखुवा निवासी गौरव चॉकलेट दिलाने के बहाने बाइक पर बैठाकर अपने साथ ले गया था। पुलिस की जांच में पता चला कि घटना वाले दिन गौरव गधे पर मिट्टी लादकर जमीन समतल कर रहा था। उसने पहले बच्ची को 20 रुपये देकर पास में स्थित परचून की दुकान पर चॉकलेट लेने भेज दिया। बाद में पीछे से दुकान पर पहुंच कर मासूम को अपने साथ मोटरसाइकिल पर बिठाकर अमराला गांव के जंगल में ईंट भट्ठे पास बने मकान में ले जाकर बच्ची के साथ कुकर्म किया। पकड़े जाने के डर से मासूम की गला दबाकर हत्या कर दी और शव वहीं छुपा दिया था। पुलिस ने जांच के दौरान बच्ची के पड़ोस में लगे सीसीटीवी कैमरे की जांच की तब मामले का खुलासा हुआ। पुलिस की पूछताछ में गौरव ने बताया था कि वारदात के समय बच्ची के पिता, दादा व दादी राशन की दुकान पर राशन लेने गए थे जबकि बच्ची की मां बीमार होने के कारण घर के अंदर थी। गौरव ने बच्ची से पीने के लिए पानी मांगा तो बच्ची ने बोतल में पानी लाकर दिया। गौरव ने उसे 20 रुपये चॉकलेट लाने को दिया था, उसके बाद घटना को अंजाम दिया।
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सोमवार को सजा के प्रश्न पर बहस करते हुए पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता योगेंद्र कुमार सिंह ने दलील देते हुए आजीवन कारावास की सजा दिए जाने की मांग की। वहीं, बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने आरोपी को नवयुवक बताते हुए कम से कम सजा दिए जाने की गुहार लगाई थी।
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