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Ghaziabad News: लॉकर में रखे छह लाख के नोट खा गए दीमक

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गाजियाबाद। कोविड के दौरान छह लाख रुपये के नोट लॉकर सुरक्षित रखने के दिए थे जिसको लॉकर में ही दीमक खा गए। यह शिकायत जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में आई थी जिसपर आयोग के अध्यक्ष प्रवीण कुमार जैन ने फैसला सुनाया है और केनरा बैंक को 60 दिन के अंदर करेंसी के जो नोट दीमक लगने से खराब हुए, उनके मूल्य का आकलन करके परिवादिनी को देने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही आयोग ने मानसिक क्षतिपूर्ति और परिवाद व्यय के रूप में भी धनराशि अदा करने का निर्देश दिया है।
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राजनगर एक्सटेंशन स्थित वीवीआईपी सोसायटी में रहने वाली महिला प्रीती कंसल ने जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में एक दिसंबर वर्ष 2022 में शिकायत पंजीकृत कराया था। उन्होंंने शिकायत की थी कि शास्त्रीनगर स्थित केनरा बैंक और नवयुग मार्केट स्थित केनरा बैंक में उनका लॉकर है जिसमें कोरोना के दौरान उनको ससुर के छह लाख के नोट सुरक्षा की दृष्टि से लॉकर में रखे थे। 17 अक्तूबर 2022 को जब वह अपने पति के साथ लॉकर देखने गईं और जब उन्होंने बैंक का सेफ खोला तो उसमें दीमक लगे थे जिससे जो नोट सेफ में रखे थे उसको नुकसान पहुंचा था।
इस मामले में तुरंत उनके पति ने ब्रांच मैनेजर को इसकी सूचना दी। ब्रांच मैनेजर ने निरीक्षण किया और पाया कि लॉकर के अंदर दीमक लगे थे। उन्होंने ब्रांच मैनेजर को पत्र लिखकर इस घटना की पूरी जानकारी देते हुए जिन नोटो पर नंबर थे उनको बदलने की मांग की गई लेकिन मैनेजर ने मना कर दिया। बाद में परेशान होकर यहां वाद दायर किया गया। प्रवीण कुमार जैन ने बताया कि परिवादिनी ने सभी साक्ष्य, शपथ पत्र के साथ उपलब्ध कराए थे जिसमें फोटो, विडियो,सीडी दाखिल किया गया था। परिवादिनी ने यह तर्क दिया कि उन्होंने विपक्षीगण से लॉकर की सुविधा ली थी जिसके लिए वह नियमित से वार्षिक भुगतान भी कर रही थीं इसलिए वह उनकी उपभोक्ता हुईं और लॉकर में रखे उनके सामान के सुरक्षा की जिम्मेदारी उनकी है।
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साक्ष्यों में शामिल विडियो देखने के बाद यह पाया गया कि लॉकर में दीमक था जिसके कारण उसमें रखा सामाना और 500 के 2000 के नोटों को नुकसान पहुंचा था। विपक्षीगण का दायित्व था कि वह लॉकर की सुरक्षा व्यवस्था सही रखें लेकिन ऐसा नहीं किया गया। यह एकपक्षीय रूप से सेवा में कमी साबित करती है। इसलिए बैंक को यह आदेश दिया गया है कि जो करेंसी दीमक लगने से खराब हुई उसका आकलन किया जाए और परिवादिनी के ससुर के नो ऑब्जेक्शन प्रमाण पत्र देने के बाद उनको धनराशि दी जाए। साथ ही 2000 परिवाद व्यय एवं मानसिक क्षतिपूर्ति के रुप में अदा की जाए। फैसले के दौरान आयोग की सदस्य शैलजा सचान, राजेंद्र प्रसाद सिंह मौजूद रहे।

इन वादों का लिया गया संज्ञान
- उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग नई दिल्ली की विधि व्यवस्था 3(2007)सीपीजे 402 एनसी यूनियन बैंक ऑफ इंडिया बनाम कनक चौधरी के केस में बैंक लॉकर में रखे नोटों को दीमक खा गया था। राष्ट्रीय आयोग ने यह निर्णय दिया था कि नोट लॉकर में खराब हुए हैं तो इसकी क्षतिपूर्ति बैंक की जिम्मेदारी है।
- राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने बैंक ऑफ बड़ौदा बनाम प्रेम कुमार एंव अन्य के वाद में 05 अप्रैल 2010 में अपील की जिसमें बैंक लॉकर में रखे उनके इंदिरा विकास पत्र को दीमक खा गए थे जिसमें बैंक की जिम्मेदारी तय की गई थी
- राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग- राजस्थान जयपुर में बैंक ऑफ बड़ौदा बनाम पदम्मासना कोठारी ने 04 दिसंबर 2019 में भी लॉकर में रखे सामान की जिम्मेदारी बैंक की निर्धारित की गई थी।
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