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तलाक-ए-हसन का मामला: याचिकाकर्ता बोलीं- सवाल मेहर का नहीं, मेरी और मेरे बेटे की जिंदगी का है

Wed, 17 Aug 2022 11:05 PM IST
Vikas Kumar माई सिटी रिपोर्टर, गाजियाबाद

सार

बेनजीर ने बताया कि 23 जून को तलाक का तीसरा खत भेजने के बाद यूसुफ ने फोन पे के माध्यम से उनके खाते में 15 हजार रुपये भेजे। उसने एक मेसेज भी भेजा जिसमें लिखा था, यह तुम्हारे इद्दत की कीमत है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
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सवाल मेहर का नहीं है, मेरी और मेरे बेटे की जिंदगी का है। कोई मर्द औरत को इस्तेमाल करके छोड़ दे, यह ठीक नहीं है। अगर कानून इसकी इजाजत देता है तो मैं ऐसे कानून से सहमत नहीं हूं। यह सही है कि मेरे पास खुला का विकल्प है, लेकिन मुझे खुला नहीं, मेरा हक चाहिए.... यह कहना है तलाक-ए-हसन की वैधता को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने वाली गाजियाबाद के विजय नगर क्षेत्र की बेनजीर हिना का।

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एक न्यूज चैनल में पत्रकार हिना फिलहाल दिल्ली में अपने मायके में रह रही हैं। पति युसुफ नकी पेशे से वकील हैं और दिल्ली के वजीराबाद में रहते हैं। हिना का कहना है कि वह तलाक नहीं, शौहर के साथ रहना चाहती हैं। उन्होंने फोन पर हुई बातचीत में कहा, युसुफ ने 19 अप्रैल को उसे तलाक का पहला खत भेजा। इस पर युसुफ के हस्ताक्षर नहीं थे। यह किसी दूसरे के नाम से भेजा गया था। तलाक देने के लिए युसुफ की तरफ से उन पर 30 आरोप लगाए गए हैं। दूसरे खत में 36 आरोप लिखे हैं। तीसरा 23 जून को मिला, इसमें 40 आरोप हैं। पहला खत मिलने के बाद ही उन्होंने दो मई को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर दी थी।

15 हजार रुपये दिए... क्या यही है मेरी जिंदगी की कीमत
बेनजीर ने बताया कि 23 जून को तलाक का तीसरा खत भेजने के बाद यूसुफ ने फोन पे के माध्यम से उनके खाते में 15 हजार रुपये भेजे। उसने एक मेसेज भी भेजा जिसमें लिखा था, यह तुम्हारे इद्दत की कीमत है। थोड़ी देर बाद उसने 2000 रुपये और भेजे, इसे बेटे का खर्चा बताया। बेनजीर कहती हैं, क्या मेरी जिंदगी की कीमत 15000 रुपये है। उनकी और युसुफ की शादी को दो साल हो गए हैं। बेटा अली 11 माह का है। उसकी देखभाल के लिए 11 साल की बच्ची को रखा था। इसके बाद आठ दिसंबर 2021 को उन्हें और बेटे अली को घर से निकाल दिया था।

फतवा जारी कराने की मिल रही धमकी
बेनजीर का कहना है कि उन पर केस वापस लेने का दबाव बनाया जा रहा है। इस्लाम से बाहर करने और फतवा जारी कराने की धमकी दी जा रही है। सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने के बाद से उनके पास फोन आने शुरू हो गए थे। उन्होंने गाजियाबाद के विजय नगर थाने में पांच अप्रैल को पति युसुफ नकी, ननद हुमा कौशर, नन्दोई जाहेद अली, ननद हिना कौशर, नन्दोई आफताब कौशर के खिलाफ दहेज उत्पीड़न और धमकी देने की धाराओं में केस दर्ज कराया था।

गवाही से भी मान्य है तलाक-ए-हसन
शरीयत में तलाक-ए-हसन तलाक देने का आदर्श तरीका बताया गया है। इसके तहत यदि शौहर व बीवी अलग-अलग रहना चाहते हैं तो तीन महीने में पाक की अवधि में शौहर तलाक का नोटिस भेज सकता है। यदि नोटिस पर शौहर के हस्ताक्षर व पता नहीं है तो यह मान्य नहीं होगा। हां, यदि गवाह के जरिए सूचना बीवी तक पहुंच जाती है तो तलाक मान्य होगा। कोर्ट में यदि मामला है तो तो वहां लिखित गवाही होना अनिवार्य है। शौहर को लिखित में देना होगा। - मुफ्ती मोहम्मद जमीर बेग
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बिना हस्ताक्षर खत मान्य नहीं
यदि शौहर ने तलाक-ए-हसन के तहत तलाक देने के लिए कोई खत बीवी को भेजा है और उस पर हस्ताक्षर नहीं है तो तलाक मान्य नहीं होगा। यदि शौहर खत भेजने की बात को तस्दीक करता है, तो शरीयत कानून के हिसाब से तलाक मान्य होगा। - मशरूर अब्बासी, शहर काजी
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