गाजियाबाद। बारिश के दौरान शहर के बड़े हिस्से को जलभराव से छुटकारा दिलाने की कवायद तेज हो गई है। औद्योगिक क्षेत्र सहित कविनगर और विजयनगर जोन के 22 वार्डों की करीब छह लाख आबादी को इस समस्या से निजात मिलेगी। 119 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित स्टॉर्म वाटर ड्रेनेज सिस्टम योजना को शासन की तरफ से सहमति मिल गई है। करीब दो किलोमीटर लंबा ड्रेन बनाकर बरसात के पानी की निकासी की व्यवस्था की जाएगी। शहर के लिए जरूरी इस योजना पर चुनाव से पहले काम शुरू होने की उम्मीद जताई जा रही है।
बृहस्पतिवार शाम मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्र की अध्यक्षता में वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक आयोजित हुई। इसमें नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक ने स्टॉर्म वाटर ड्रेन की योजना का प्रस्तुतिकरण दिया। मुख्य सचिव की तरफ से इस प्रस्ताव पर सहमति जताई गई है। योजना के तहत संजयनगर, बुलंदशहर रोड औद्योगिक क्षेत्र, कविनगर औद्योगिक क्षेत्र, क्रॉसिंग रिपब्लिक, विजय नगर होकर नोएडा के शाहबेरी पुलिया से हिंडन नदी तक करीब दो किलोमीटर लंबा ड्रेनेज सिस्टम तैयार किया जाना है। इसके बनने से नगर निगम क्षेत्र के 22 वार्डों में जलभराव की समस्या से राहत मिलने की उम्मीद है।
फिलहाल, यहां कच्चा नाला है, जिसका दोबारा से निर्माण कर बारिश के पानी की निकासी के लिए ड्रेनेज सिस्टम के रूप में तैयार किया जाएगा। पुराने नाले की जर्जर हालत बनी हुई है। बारिश होने पर यह ओवरफ्लो हो जाता है और सड़कों पर जलभराव के कारण सड़कें क्षतिग्रस्त हो जाती हैं। इसमें हादसों का खतरा भी बना रहता है।
ड्रेनेज सिस्टम 10 मीटर चौड़ा और 10 मीटर गहरा बनाया जाएगा। अधिकारियों ने बताया कि चुनाव से पहले योजना को औपचारिक मंजूरी मिलने की उम्मीद है। बजट को मंजूरी मिलते ही निविदा प्रक्रिया पर काम शुरू कर दिया जाएगा। मुख्य अभियंता निर्माण एनके चौधरी का कहना है कि कविननगर के 15 वार्ड और विजयनगर जोन के सात वार्ड के लोगों को जलभराव की समस्या से निजात मिलेगी।
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50 साल पुराने नाले के भरोसे जलनिकासी
निर्माण विभाग के अधिकारियों ने बताया कि मौजूदा नाला 50 साल से भी पुराना है, जो पूरी तरह जर्जर हो चुका है। दीवारें गिर रही हैं, बारिश होने पर पानी के बहाव से कटान हो जाता है। नाले के साथ वाली सड़कों की स्थिति जर्जर हो जाती है। इन्हें बनाने पर नगर निगम को बार-बार भारी-भरकम रकम खर्च करनी पड़ती है। राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण के दौरान कई जगह से नाला बंद हो गया था, जिससे औद्योगिक क्षेत्रों की सड़कों पर जलभराव की समस्या बढ़ गई है।
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मॉडल रोड योजना पर नहीं बनी बात
शहर की चार सड़कों को मॉडल रोड के रूप में विकसित करने की योजना में अभी अड़चन बनी हुई है। शुक्रवार को नगर आयुक्त खुद इस योजना का प्रस्तुतिकरण देने के लिए लखनऊ गए थे लेकिन इस प्रस्ताव पर कोई चर्चा नहीं हुई है। योजना में कुछ बदलाव भी किए जाने हैं। दोबारा से इसका प्रस्तुतिकरण शासन के समक्ष होगा। मुख्यमंत्री-ग्रीन रोड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट स्कीम (अर्बन) के अंतर्गत योजना के लिए 100 करोड़ रुपये का बजट मिलना है।
स्टॉर्म वाटर ड्रेनेज सिस्टम के प्रस्ताव पर मुख्य सचिव ने सहमति जता दी है। शहर के लिए बेहद जरूरी इस योजना पर नगर निगम की तरफ से लगातार प्रयास किया जा रहा है। जल्द ही काम शुरू होने की उम्मीद है। - विक्रमादित्य सिंह मलिक, नगर आयुक्त