गाजियाबाद। जिले में आयुष्मान कार्ड धारकों को योजना का लाभ लेना आसान नहीं है। सरकारी अस्पतालों में सुविधा नहीं होने और निजी अस्पतालों के इलाज में आनाकानी करने से आयुष्मान गोल्डन कार्ड धारकों को योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। प्राइवेट अस्पताल में भर्ती मरीजों से कहा जाता है कि इस बीमारी की संबद्धता अस्पताल में नहीं है। अगर इलाज कराना है तो भुगतान करना पड़ेगा। योजना में जिले में सात सरकारी और 36 निजी अस्पताल शामिल किए गए हैं।
केंद्र सरकार ने आयुष्मान योजना वर्ष 2018 में शुरू की थी। पांच वर्ष में सिर्फ 22187 कार्ड धारकों को ही निजी अस्पतालों में इलाज मिल सका है। योजना के तहत जिले में 774998 कार्ड धारक हैं। इनमें से अब तक सिर्फ 2.15 लाख के ही गोल्डन कार्ड बन सके हैं। शासन स्तर से योजना के लाभार्थियों के गोल्डन कार्ड बनाने के लिए कई योजनाएं शुरू की गई। इनमें सीएचसी, पीएचसी स्तर से लेकर सीएचओ को भी गोल्डन कार्ड बनाने के लिए अधिकृत किया गया है। जनसुविधा केंद्र पर भी गोल्डन कार्ड बनवाए जा सकते हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग मरीजों को इलाज करा पाना तो गोल्डन कार्ड भी नहीं बना पा रहा है।
क्यों नहीं बनवा रहे लाभार्थी गोल्डन कार्ड
आयुष्मान योजना के तहत कार्ड धारक को पांच लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा है। योजना में शामिल अस्पतालों को अलग-अलग बीमारी के उपचार के लिए अनुबंधित किया गया है। लोगों को यह पता नहीं है कि किस अस्पताल में कौन की बीमारी का उपचार होगा। स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोई जानकारी नहीं दी जाती है। कार्ड धारक अस्पताल पहुंचता है और उसे बताया जाता है कि उसकी बीमारी का उपचार अस्पताल में नहीं हो सकेगा। भर्ती होने से पहले ओपीडी और जांच का खर्च व उपचार के लिए अस्पताल दर अस्पताल भटकने के चलते योजना का लाभ नहीं मिल पाता, इसलिए गोल्डन कार्ड बनवाने में रुचि नहीं ले रहे हैं।
शिकायत पर नहीं होती कार्रवाई
योजना के तहत इलाज कराने वाले कई लाभार्थी ऐसे हैं, जिन्हें संबंधित अस्पताल ने उपचार करने से मना कर दिया था और सीएमओ से शिकायत किए जाने के बाद उनके निर्देश पर अस्पताल ने मरीज का उपचार किया। इस तरह के मामलों में स्वास्थ्य विभाग की ओर से संबंधित अस्पतालों के खिलाफ किसी तरह की कार्रवाई नहीं की गई। कई अस्पताल मरीज के इलाज से पहले ही धनराशि जमा करने का दबाव बनाते हैं। तर्क दिया जाता है कि शासन स्तर से भुगतान होने के बाद रकम वापस कर दी जाएगी। ऐसे मामलों में भी स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की जाती।
नहीं मिला निशुल्क इलाज
घूकना निवासी आयुष्मान गोल्डन कार्ड धारक बाल किशन को खांसी, बुखार और सांस लेने पर परेशानी हुई तो परिजनों ने उन्हें मरियम नगर स्थित अस्पताल में भर्ती कराया। वहां पर बताया गया कि इस बीमारी का इलाज कार्ड के तहत नहीं होगा। परिजनों को 45 हजार रुपये भुगतान करना पड़ा।
नहीं मिला इलाज, ले गए दूसरे अस्पताल
साहिबाबाद निवासी आयुष्मान गोल्डन कार्ड धारक राजू के पेट में कई दिन से दर्द हो रहा था। वह वसुंधरा के एक अस्पताल में इलाज कराने गए तो वहां बताया गया कि इस बीमारी का इलाज कार्ड के तहत नहीं होगा। भुगतान करना पड़ेगा। इलाज में 22 हजार रुपये का भुगतान करना पड़ा।
अस्पतालों में लगाई जाएगी सूची
नोडल अधिकारी डॉ. चरण सिंह ने बताया कि संबद्ध अस्पतालों को योजना के तहत उपलब्ध उपचार संबंधी बोर्ड लगाने के निर्देश दिए गए हैं। योजना से संबंधित सभी अस्पतालों की सूची और किस अस्पताल में कौन सी बीमारी का उपचार मिलेगा, इसके बोर्ड लगाए जाएंगे, जिससे योजना के लाभार्थियों को उपचार करवाने में परेशानी का सामना न करना पड़े।