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सेफ सिटी प्रोजेक्ट : कमजोर पड़ा तीसरी आंख का पहरा

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गाजियाबाद। सीसीटीवी कैमरों की निगरानी से शहर को सुरक्षित बनाने की योजना ने दम तोड़ दिया है। पहले चरण में 1500 सीसीटीवी कैमरों को नियंत्रण कक्ष से जोड़ने का लक्ष्य है लेकिन महज 52 कैमरों से ही शहर की निगरानी हो रही है। लगभग 200 कैमरों का एक्सेस भवन मालिकों ने वापस ले लिया है। कैमरों का संपर्क टूटने से योजना आगे नहीं बढ़ पा रही है।
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पिछले करीब 10 दिनों में 255 कैमरों और डीवीआर का एक्सेस लिया गया लेकिन करीब 200 भवन मालिकों ने पासवर्ड बदलकर कंट्रोल सेंटर से संपर्क खत्म कर दिया। अब केवल महज 55 कैमरे ही काम कर रहे हैं। कैमरों के इंटीग्रेशन का कार्य कर रही कंपनी और नगर निगम के प्रतिनिधि लगातार भवन मालिकों से संपर्क साधकर समझाने का प्रयास कर रहे हैं कि परिसर के बाहर लगे कैमरों का ही एक्सेस लिया जा रहा है। इससे भवन मालिकों की निजता का किसी भी तरह हनन नहीं होगा लेकिन कैमरों का एक्सेस देने से भवन मालिक कतरा रहे हैं। करीब डेढ़ महीने से चल रही कवायद के बावजूद 1200 से अधिक कैमरों का एक्सेस मिला ही नहीं हैं, जबकि लगभग 200 भवन मालिकों ने पहले कैमरों का एक्सेस दे दिया और बाद में पासवर्ड बदल दिया। इनसे दोबारा संपर्क साधा गया तो भवन मालिकों ने अपने निजी कैमरों का इस्तेमाल करने की सहमति देने से स्पष्ट मना कर दिया। बता दें कि ऑपरेशन दृष्टि के तहत पुलिस ने अब तक आठ हजार से अधिक कैमरों की जानकारी थाना स्तर पर जुटाई है। पहले चरण में 1500 सीसीटीवी कैमरों और डीवीआर का एक्सेस भवन मालिकों से लेना है।


कैमरे ले लो पर एक्सेस नहीं देंगे
निगम अधिकारियों ने बताया कि कई औद्योगिक क्षेत्रों और बड़े परिसरों के बाहर लगे कैमरों का एक्सेस लेने के लिए टीमें पहुंच रही है लेकिन इसमें भवन मालिक रुचि नहीं दिखा रहे हैं। कुछ उद्यमियों ने तो नए कैमरे खरीदकर निगम को देने की दलील दे दी लेकिन पहले से लगे कैमरों का एक्सेस देने से इन्कार कर दिया। निगम अधिकारियों का कहना है कि कैमरे लेकर लगा भी देंगे तो इनके रखरखाव और वाईफाई का खर्च उठाने के लिए भवन मालिक तैयार नहीं हैं।
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फिलहाल केवल 55 कैमरों का एक्सेस ही मिल पाया है। लगभग 200 कैमरों का एक्सेस टूट गया है। सेफ सिटी प्रोजेक्ट में भवन मालिकों का कोई सहयोग नहीं मिल रहा है। - एनके चौधरी, मुख्य अभियंता, नगर निगम निर्माण विभाग
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