गाजियाबाद। आरटीई के तहत होने वाले दाखिले में निजी स्कूलों की मनमानी पर अधिकारी रोक नहीं लगा पा रहे हैं। प्रभारी मंत्री के आदेश के बाद भी बच्चों के दाखिलों की संख्या स्कूलों में नहीं बढ़ पाई है। 10 जुलाई को कलक्ट्रेट में प्रभारी मंत्री असीम अरुण ने समीक्षा बैठक में 15 जुलाई तक आरटीई के तहत चयनित सभी बच्चों के दाखिले कराने के आदेश दिए थे। लेकिन शिक्षा विभाग नाकामयाब रहा और दाखिले नहीं करा पाया।
चारों चरणों में कुल चयनित 6080 बच्चों में से 3158 बच्चों का दाखिला स्कूलों में हुआ है। पिछले एक सप्ताह में केवल 148 बच्चों का दाखिला स्कूलों में कराया गया है। बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय और खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय, कविनगर पर हर दिन दाखिला न होने की शिकायत लेकर अभिभावक आते हैं और निराश होकर लौट जाते हैं। अभिभावक स्कूलों के चक्कर लगाकर भी परेशान हैं। सत्र शुरू हुए तीन महीने से ज्यादा का समय हो गया है लेकिन पहली लॉटरी में चयनित बच्चों के भी दाखिले नहीं हुए हैं। पहले चरण की लॉटरी फरवरी में निकली थी जिसमें 3721 बच्चे चयनित हुए थे।
चरण चयनित बच्चे
पहला चरण 3,721
दूसरा चरण 1,548
तीसरा चरण 596
चौथा चरण 220
कार्रवाई का कागजी खेल शुरू
गाजियाबाद पेरेंट्स एसोसिएशन की अध्यक्ष सीमा त्यागी ने कहा कि दाखिले न करने वाले स्कूलों पर कभी भी कोई कार्रवाई नहीं की गई। हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी दाखिला न करने वाले स्कूलों पर कार्रवाई करने का कागजी खेल शुरू हो गया है। स्कूलों की मान्यता समाप्त करने के लिए कई जगह पत्र भी हर वर्ष भेजे जाते हैं लेकिन उसका कोई फायदा नहीं होता। अंत में हजारों बच्चे शिक्षा के अधिकार से वंचित रह जाते हैं। इस वर्ष भी शिक्षा विभाग शत प्रतिशत बच्चों का दाखिला नहीं करा पाएगा।
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बयान
स्कूलों में दाखिले कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। दाखिले न करने वाले सात स्कूलों की मान्यता रद्द करने की कार्रवाई के लिए शासन को पत्र भी भेजा गया है। जल्द से जल्द सभी बच्चों के दाखिले स्कूलों में कराए जाएंगे। - ओपी यादव, बेसिक शिक्षा अधिकारी