गाजियाबाद। रैपिडेक्स कॉरिडोर के स्टेशन बिजली के लिए ऊर्जा निगम के भरोसे नहीं रहेंगे। शनिवार को दुहाई डिपो में लगाए गए 585 किलोवाट क्षमता का सौर ऊर्जा प्लांट चालू हो गया। एनसीआरटीसी के प्रबंध निदेशक विनय कुमार सिंह ने इसका उद्घाटन किया। दिल्ली से मेरठ तक इस कॉरिडोर के सभी स्टेशनों पर सौर ऊर्जा प्लांट लगाकर एनसीआरटीसी ने 11 मेगावाट बिजली का उत्पादन प्रतिदिन करने का लक्ष्य तय किया है। स्टेशनों की जरूरत के अतिरिक्त इस ऊर्जा को ट्रेनों के संचालन में भी इस्तेमाल किया जाएगा।
दुहाई डिपो इस कॉरिडोर का पहला स्टेशन है जिस पर सौर ऊर्जा प्लांट शुरू किया गया है। बिजली की खपत के लिहाज से अब यह ग्रीन डिपो बन गया है। एनसीआरटीसी के प्रबंध निदेशक विनय कुमार सिंह ने बताया कि 585 किलोवाट क्षमता के इस सौर ऊर्जा प्लांट को डिपो, स्टेशन और वर्कशॉप की इमारतों पर सौर पैनल लगाकर तैयार किया गया है। इस प्लांट से डिपो की बिजली की खपत को पूरा करने के बावजूद अतिरिक्त बिजली उत्पादित की जाएगी। इस अतिरिक्त बिजली का इस्तेलाम ट्रेन के संचालन या अन्य स्टेशनों के लिए किया जा सकेगा। उन्होंने बताया कि अपने 25 साल के काल में यह प्लांट प्रति वर्ष करीब 6.66 लाख यूनिट बिजली पैदा करेगा और इससे सालाना करीब 615 टन और 25 साल के जीवनकाल में तकरीबन 15,375 टन कार्बन उत्सर्जन की कमी आएगी।
एप्लीकेशन के जरिए की जाएगी मॉनीटरिंग
एनसीआरटीसी के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी पुनीत वत्स का कहना है कि इस सोलर प्लांट से उत्पादित होने वाली सौर ऊर्जा की मॉनिटरिंग और संचालन क्लाउड आधारित एक एप्लीकेशन के जरिए किया जाएगा। यह आउटपुट को निरंतर ट्रैक करेगा। यह तकनीक सौर ऊर्जा प्लांट की दक्षता और निर्बाध प्रबंधन सुनिश्चित करेगी।
एक लाख वाहन सड़कों से होंगे कम
एनसीआरटीसी के अधिकारियों का कहना है कि दिल्ली से मेरठ तक बनाए जा रहे आरआरटीएस के पहले कॉरिडोर के पूरा हो जाने पर एक लाख से ज्यादा वाहनों के सड़कों से कम हो जाने की उम्मीद है। इससे करीब 2.5 लाख टन कार्बन डाईऑक्साइड के उत्सर्जन में कमी आएगी और वायु प्रदूषण कम करने में मदद मिलेगी।