गाजियाबाद। झगड़ा था वकीलों और पुलिस के बीच लेकिन इसका खामियाजा भुगतना पड़ा लगभग आधे शहर के लोगों को। हापुड़ रोड जाम हो जाने से जन-जीवन थम सा गया। स्कूली बच्चे छुट्टी के बाद जाम में फंस गए और एक घंटा देरी से पहुंचे। हापुड़ रोड से ट्रैफिक कविनगर, नेहरूनगर और राजनगर में पहुंचा तो यहां जाम लग गया। पुलिस ने हापुड़ रोड का ट्रैफिक डायवर्ट किया तो लोगों के लिए सफर लंबा हो गया।
कचहरी के सामने जाम लगने से वाहनों की कतार जीटी रोड पर हापुड़ मोड़ तक पहुंच गई। भीषण गर्मी में लोग घंटों जाम खुलने का इंतजार करते रहे लेकिन अधिवक्ताओं के नहीं हटने से वे जूझते रहे, इसके बाद पुलिस ने रूट डायवर्जन कर दिया। पुराना बस अड्डा से मेरठ रोड की ओर वाहनों को निकाला गया। वहीं, हापुड़ चुंगी से एएलटी व कविनगर की ओर रूट डायवर्ट किया गया।
सबसे अधिक परेशानी हापुड़ चुंगी से पुराने बस अड्डे की तरफ आने वाले बच्चों को हुई। वहीं पुराने बस अड़्डे से डासना की तरफ जाने वाले यात्रियों को पैदल ही हापुड़ चुंगी तक जाना पड़ा। गर्मी होने से बच्चे और महिलाएं अधिक परेशान हुईं।
बंद कर दिए थे कचहरी के सभी गेट : आक्रोशित अधिवक्ताओं ने कचहरी के सभी गेट बंद कर नारेबाजी शुरू कर दी थी। इससे मुकदमे की पैरवी के लिए आए वादकारी भी कचहरी में ही फंस गए। हर वादकारी अपने अधिवक्ता के चैंबर की तरफ भागने लगा और कचहरी में तैनात पुलिस कर्मी भी कचहरी से भाग खड़े हुए। इस अफरा-तफरी के माहौल में कई वकीलों ने कचहरी से बाहर निकल रहे वादकारियों की पिटाई भी कर दी। कवरेज करने पहुंचे कई पत्रकारों के मोबाइल फोन भी तोड़ दिए और कवरेज करने से रोक दिया।
पुलिस ने मुझे पीटा, झूठा केस बनाया
जेल से छूटने के बाद अधिवक्ता पवन त्यागी ने कहा कि उनके परिचिति के साथ लूट हुई थी। वह उसकी पैरवी के लिए गए थे। पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया। उन्हें बुरी तरह पीटा। उनके चेहरे पर पिस्टल से वार किया। इससे उन्हें चोट आई, इसका निशान भी बन गया है। इसके बाद पुलिसवाले उन्हें थाने ले गए। उनके खिलाफ शांतिभंग का झूठा केस बना दिया और जेल भेज दिया। यह सरासर ज्यादती है। पुलिस ने वर्दी फाड़ने और पिस्टल लूट के प्रयास भी झूठा केस बनाया है। इसकी पूरी कहानी मनगढ़ंत है।
पुलिस के साथ अभद्रता की गई
डीसीपी ग्रामीण रवि कुमार का कहना है कि वकील के साथ अभद्रता और पिटाई के आरोप गलत हैं। पवन त्यागी व उनके साथियों ने मौके पुलिस के कार्य में बाधा डाली और पुलिस से साथ अभद्रता की थी। पुलिस ने जो केस दर्ज किया है, उसकी जांच की जा रही है। जो तथ्य सामने आएंगे उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। पुलिस पर लगाए जा रहे आरोपों की जांच की जा रही है। अभी तक की जांच में पुलिस के साथ अभद्रता की बात सामने आई है। इसी आधार पर कार्रवाई की गई है।
वकीलों की तीन मांग
बार एसोसिएशन के अध्यक्ष योगेश कौशिक का कहना है कि पुलिस से तीन मांग हैं। पवन त्यागी के खिलाफ दर्ज केस खारिज किया जाए। दोषी पुलिसवाले निलंबित किए जाएं। उनके खिलाफ केस भी दर्ज किया जाए। ये मांगे पूरी होने तक अधिवक्ता आंदोलन करेंगे।
बैठक के बाद निर्णय होगा
डीसीपी नगर निपुण अग्रवाल का कहना है कि बुधवार को अधिवक्ताओं की बैठक पर नजर है। बैठक के बाद तय किया जाएगा कि मंगलवार को लगाए गए जाम के मामले में क्या कार्रवाई की जाए। अगर जाम के दौरान किसी के साथ कोई घटना हुई है तो इसकी तहरीर मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।
सुबह से शाम तक चला हंगामा
सुबह 10 बजे: कचहरी परिसर में अधिवक्ताओं ने अपने साथी की गिरफ्तारी होने पर हंगामा शुरू किया।
सुबह 10:15 बजे: कचहरी परिसर में अधिवक्ता इकट्ठा हो गए और पुलिस के खिलाफ नारेबाजी की।
सुबह 10:45 बजे: अधिवक्ता कचहरी परिसर से निकलकर हापुड़ रोड पर पहुंच गए।
सुबह 11 बजे: अधिवक्ताओं ने हापुड़ रोड पर जाम लगाया और पुलिस व अधिवक्ताओं के बीच नोंकझोंक हुई।
सुबह 11:30 बजे: अधिवक्ताओं के आक्रोश को देख मौके पर पीएसी और चार थानों की फोर्स पहुंची।
दोपहर 12 बजे: अधिवक्ताओं ने राजनगर-कविनगर के संपर्क मार्गों पर भी बेरिकेडिंग कर जाम लगाया।
दोपहर एक बजे: पुलिस ने अधिवक्ताओं से बातचीत करने का प्रयास किया।
दोपहर दो बजे: अधिवक्ता सड़क पर स्पीकर ले आए और देशभक्ति गाने बजाए।
शाम चार बजे: अधिवक्ता पवन के रिहा होने के बाद हालात सामान्य होने शुरू हुए।
शाम 6:30 बजे: अधिवक्ता पवन कचहरी परिसर पहुंचे, तब अधिवक्ता सड़क से हटे।
शाम 7 बजे: हापुड़ रोड पर यातायात सामान्य हुआ।